प्रतिनिधि, दुमका। बाबा बासुकिनाथ से विनती कर अपनी फरियाद यह कह कर सुनाते हैं कि देवघर,देवलोक देव धन्य महादेव, से हो जे हुकुम कैलो जाहू बाबा बासुकी।प्राचीन दारूका वन में स्थित नागेश्वर शिवलिंग ही वर्तमान में बासुकीनाथ कहलाते हैं।बाबा बासुकीनाथ एक स्वयंभू शिवलिंग है जो बासुकी सिंह परिहार के द्वारा कंद मूल उखाड़ने के क्रम में भूमि से प्रकट हुए और बासुकीनाथ कहलाए।अभी वर्तमान में भी बासुकिनाथ महादेव का मुख्य पुजारी परिहार क्षत्रिय वंश का ही है।परिहार क्षत्रिय वंश का नाथ के सेवा में कार्यरत है।बाबा बासुकिनाथ की महिमा निराली है।यहां आने वाले सभी शिवभक्तों की सभी मनोकामनाएं बाबा बासुकिनाथ पूरी करते हैं।रोग ,शोक,निर्धनता , निसंतानता बाबा बासुकिनाथ के सेवा एवम जलार्पण से दूर हो जाता है। तभी तो बाबा बासुकिनाथ नागेश दरबार में पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या प्रत्येक साल बढ़ती ही जा रही है।बाबा बासुकिनाथ में पूजा करने वाले श्रद्धालुओं में धन,दौलत,पद,बाहुबल,घमंड का कोई मोल नहीं है । इनके शरण में सिर्फ एक सेवक,एवम भक्त बन आने से उनका कल्याण ही कल्याण है । ऐसे भक्तों की सभी बाधाएं दूर कर बाबा बासुकिनाथ उनके जीवन में सुख समृद्धि प्रदान करते है।





