श्रीनगर |

जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के स्थापना दिवस के अवसर पर सोमवार को श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर पार्क में एक विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में समर्थकों और कार्यकर्ताओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार की नीतियों, जम्मू-कश्मीर के लोगों के प्रति बढ़ते अविश्वास और नेशनल कॉन्फ्रेंस के दोहरे रवैये पर जमकर हमला बोला।

कश्मीरी युवाओं, कर्मचारियों और आदिवासियों को निशाना बनाने का आरोप

अपने संबोधन में पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के लोगों, विशेषकर युवाओं, सरकारी कर्मचारियों और आदिवासियों के साथ हो रहे व्यवहार पर गहरे सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीरी युवाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है, स्थानीय अधिकारियों को नौकरियों से निकाला जा रहा है और आदिवासियों को उनकी पैतृक जमीनों से बेदखल किया जा रहा है।

महबूबा मुफ्ती ने सीधा सवाल करते हुए कहा:

"हरियाणा में हमारे कश्मीरी बच्चों को क्यों पीटा जाता है? हमारे लोग जेलों में क्यों बंद हैं? हमारे आदिवासी भाइयों को उनकी जमीनों से क्यों निकाला जा रहा है? आखिर देश के भीतर हमारे प्रति इतना संदेह और भरोसे की इतनी बड़ी कमी (Trust Deficit) क्यों है?"

1947 के विलय का जिक्र: वफादारी पर बार-बार सवाल क्यों?

भारत में जम्मू-कश्मीर के विलय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को याद करते हुए महबूबा मुफ्ती ने शेख मोहम्मद अब्दुल्ला, महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू के योगदान का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम बहुल राज्य होने के बावजूद जम्मू-कश्मीर के लोगों ने भारत के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर भरोसा जताते हुए इसके साथ जुड़ने का फैसला किया था। लेकिन आज की स्थिति यह हो गई है कि आम कश्मीरियों को अपनी वफादारी का सबूत देना पड़ रहा है।

"आज हालात ऐसे बना दिए गए हैं कि यदि कोई आम कश्मीरी 'इंशाअल्लाह' जैसा साधारण धार्मिक शब्द भी बोल दे, तो उसे तुरंत 'पाकिस्तानी' करार दे दिया जाता है। यह अविश्वास की पराकाष्ठा है।"

"ताकत के बल पर स्थायी शांति संभव नहीं" — वाजपेयी की नीतियों का स्मरण

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दौर को याद करते हुए PDP अध्यक्ष ने कहा कि वाजपेयी जी की शांति, सुलह और बातचीत की पहल ने जम्मू-कश्मीर में आपसी समझ और इंसानियत का माहौल बनाया था।

केंद्र सरकार से सार्थक बातचीत शुरू करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा:

"आप कब तक कश्मीर को पाबंदियों में जकड़कर रखेंगे? आप हमेशा डंडे के जोर पर लोगों पर शासन नहीं कर सकते। शांति कभी ताकत के बल पर नहीं आ सकती, इसके लिए कश्मीरियों की आवाज सुननी होगी और उनका दिल जीतना होगा।"

महबूबा मुफ्ती ने स्पष्ट किया कि PDP संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद ने हमेशा नई दिल्ली और श्रीनगर के बीच की दूरियों को कम करने का काम किया। उन्होंने ही वाजपेयी जी को कश्मीर लाकर आम कश्मीरी के दर्द से रूबरू कराया था।

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डॉ. फारूक अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस पर तीखा हमला

नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान से संबंधित हालिया बयानों पर तंज कसते हुए महबूबा मुफ्ती ने इसे 'दोहरा मापदंड' करार दिया।

उन्होंने कहा:

"कल तक जो पाकिस्तान के खिलाफ बोलते थे, आज वही कह रहे हैं कि पाकिस्तान हमारा रक्षक है। उनके इस तरह के बयानों से ऐसा संदेश जाता है कि आम कश्मीरी पाकिस्तान से सहानुभूति रखता है। यही दोहरा रवैया उस 'भरोसे की कमी' के लिए जिम्मेदार है, जिसकी सजा आज का आम कश्मीरी भुगत रहा है। 1947 से लेकर आज तक यदि इस स्थिति के लिए कोई जिम्मेदार है, तो वह नेशनल कॉन्फ्रेंस का नेतृत्व है।"

आत्म-चिंतन और अधिकार बहाली का संकल्प

सम्मेलन में उमड़ी भारी भीड़ का आभार व्यक्त करते हुए महबूबा ने कहा कि कार्यकर्ताओं का यह उत्साह मुफ्ती मोहम्मद सईद के सपनों को जीवित रखता है। उन्होंने कहा कि समय आ गया है जब हमें आत्म-चिंतन (Self-Introspection) करना होगा कि हम इस मोड़ तक कैसे पहुंचे।

उन्होंने दोहराया कि PDP राज्य के लोगों की गरिमा, भरोसे और राजनीतिक अधिकारों की बहाली के लिए अपनी आवाज उठाना जारी रखेगी।

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