मानगो उमा अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मरीज की मौत, शव को रख दिया बेसमेंट में,चूहों ने कुतरा
शव से खून निकलता देख परिजनों ने किया हंगामा, लगाया आंख निकालने का आरोप,वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में हुआ पोस्टमार्टम, अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग
विशेष संवाददाता,जमशेदपुर। उलीडीह थाना अंतर्गत मानगो नेशनल हाईवे 33 बिग बाजार के पास स्थित उमा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मरीज की मौत के बाद गुरुवार परिजनों ने जमकर हंगामा किया। उनका आरोप था कि शव से आंखों को निकाल लिया गया है। इस दौरान हंगामे की सूचना पाकर संबंधित थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और हंगामा कर रहे लोगों को समझाने का प्रयास किया। मगर आक्रोशित परिजन अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। साथ ही मामले को लेकर परिजनों ने इसकी शिकायत एसएसपी से भी की है।
मामले में बताया जा रहा है कि सरायकेला खरसावां जिला के नीमडीह निवासी सहदेव महतो बीते 28 जुलाई की रात्रि सड़क दुर्घटना के शिकार हो गए थे,जिसके बाद थाना प्रभारी ने घायल को इलाज के लिए स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था।जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया। जहां 2 दिनों तक इलाज चलने के बाद उसे रांची के रिम्स सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया गया। मगर मृतक के परिवार में देखभाल करने के लिए कोई ना होने के कारण परिजन उसे 1 अगस्त को इलाज के लिए उमा अस्पताल लेकर गए। जहां इलाज के दौरान 2 अगस्त की रात्रि मरीज की मौत हो गई,जिसके बाद 3 अगस्त की सुबह परिजन अस्पताल से शव लेकर एंबुलेंस में रखने के दौरान उन्होंने देखा कि शव की ठुड्ढी और दोनों आंख के पास से खून निकल रहा है, जिससे परिजनों को शव का दाहिना आंख निकाल लेने की शंका हुई। इस दौरान परिजनों ने देखा कि शव के दाहिने आंख में रुई ठुसी हुई थी। साथ ही पट्टी से मुंह भी बंधा हुआ था, जिससे उनका शक और गहरा गया और सभी ने अस्पताल परिसर में हंगामा करना शुरू कर दिया।
मामले में मृतक सहदेव महतो के भाई शिवदेव महतो ने बताया कि भाई को इलाज के लिए जब अस्पताल में भर्ती कराया गया था तो सब कुछ ठीक था। मगर शव को देखकर ऐसा नहीं लगता है। दुर्घटना के दौरान उसके सर में चोट आई थी तो फिर आंख और चेहरे से खून कैसे निकलने लगा।वह भी उसकी मौत के इतनी देर बाद। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर भाई का आंख निकाल लेने का आरोप भी लगाया है। साथ ही भाई के शव का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी में कराने की बात भी कही। जबकि दूसरी तरफ उमा अस्पताल के संचालक डॉ ओम प्रकाश ने कहा कि लगाया गया आरोप बिल्कुल निराधार है। मरीज की मौत 2 अगस्त की रात्रि ही हो गई थी,जिसके बाद हमने परिजनों को शव ले जाने के लिए कहा था। मगर परिजन शव लेकर नहीं गए,जिसके कारण हमने शीतगृह न होने के कारण शव को अस्पताल के बेसमेंट में रख दिया,जिससे ऐसी संभावना जताई जा रही है कि बेसमेंट में शव होने के कारण चूहों ने उसे कुतर दिया,जिससे आंख और ठुड्ढी से खून निकलने लगा। फिलहाल भाई की लिखित शिकायत पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।





