मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, लॉ के छात्रों की अपेक्षा दो से तीन गुना अधिक तनाव एमबीबीएस के छात्रों में : डॉ प्रताप शरण
टीएमएच में हुआ इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी ऑफ झारखंड शाखा का वार्षिक सम्मेलन
प्रतिनिधि,जमशेदपुर। इन दिनों मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, लॉ समेत अन्य छात्रों की अपेक्षा दो से तीन गुना अधिक तनाव एमबीबीएस के छात्रों में पाया गया है। उक्त बातें शनिवार दिल्ली एम्स के प्रोफेसर डॉ प्रताप शरण ने इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी ऑफ झारखंड शाखा का वार्षिक सम्मेलन में कही। टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) व मणिपाल टाटा मेडिकल कालेज के मनोचिकित्सा विभाग की ओर से आयोजित सम्मेलन में प्रदेश भर से मनोचिकित्सक शामिल हुए,जिसमें बतौर मुख्य अतिथि टीएमएच के जीएम डॉ सुधीर राय व विशिष्ट अतिथि मणिपाल टाटा मेडिकल कालेज के डीन डॉ जी प्रदीप कुमार उपस्थित रहे।
मौके पर दिल्ली एम्स से आए डॉ प्रताप शरण ने कहा कि अन्य छात्रों की अपेक्षा एमबीबीएस छात्रों में तनाव अधिक होने की मुख्य वजह काम का बोझ है। साथ ही परिवार को समय न दे पाने के अलावा इसके अन्य कारण भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 14 से 15 घंटे का समय एमबीबीएस छात्र पढ़ाई और ड्यूटी में देते हैं। ऐसे में वे न तो खुद के लिए समय निकाल पाते हैं और न ही परिवार के लिए। वहीं उन्होंने इसे एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि इसका समाधान निकालना होगा। अन्यथा इसका असर चिकित्सक के साथ-साथ रोगियों पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि थका हुआ व्यक्ति ज्यादा देर तक काम नहीं कर सकता और अगर करेगा भी तो वह जोर-जबरदस्ती से करेगा,जिससे गलती होने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती है।
इस दौरान अगले कार्यकाल के लिए नए अध्यक्ष का चुनाव भी किया गया,जिसके तहत सर्वसम्मति से टीएमएच के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ मनोज साहू को अध्यक्ष चुना गया। इस दौरान उन्होंने अपना कार्यभार भी ग्रहण किया। उक्त कार्यक्रम में आयोजन समिति के चेयरमेन सह टीएमएच मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ मनोज साहू, इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी आफ झारखंड शाखा के अध्यक्ष डॉ अविनाश शर्मा, सचिव डॉ आलोक प्रताप, डॉ सुशांत पाढ़ी, डॉ महेश हेंब्रम समेत अन्य मौजूद थे।





