पूर्वांचल सूर्य संवादाता,बरही।बरही चौराहा यात्रियों को चारों दिशा में बस ऑटो से आवागमन का सुलभ साधन है।बनारस,

पटना,जमशेदपुर या कोलकाता जाना हो तो यात्री बरही चोराहा पहुंचते हैं और उन्हें 24 घंटा यात्री बस से सुविधा मिल जाती है,लेकिन यह सुविधा यात्रियों के लिए आफत से कम नहीं है। जहां बस रुकती है वहां यात्रियों का ठहराव की व्यवस्था बिल्कुल शून्य है।यदि समय पर यात्री को बस का इंतजार करना पड़े तो यहां फैले दुर्गंध से उन्हें नाक सिकोड़ना कर रुमाल रखना और गंदगी से हाय तौबा करना ही पड़ता है। बरही चौराहे से गुजरने वाले यात्री यदि ठहराव कर ले तो शहर में फैले गंदगी का सामना उसे करना ही पड़ता है।स्थानीय लोगों की बात करें तो इस गंदगी का झेलना आदत सी हो गई है।विचारणीय है कि चौक पर फैले गंदगी का अंबार से न स्थानीय प्रशासन प्रवाह है और न ही एनएच के अधिकारियों को इस ओर ध्यान है।





बता दें कि बरही चौक के पास गंदगी वजह मछली दुकानें हैं।सड़क पर मछली की दुकानें सजती है,बिक्री के बाद उसका गंदे अवशेष सड़कों पर छोड़ दिया जाता है।दूसरी वजह ठेले, खुमचे और फलों का अवशेष भी इस गंदगी कारण है। इतना ही नहीं कुछ लोग सड़क को कूड़ेदान समझ लिया है,जो घर की गंदगी सड़क पर ही फेंकने का आदत सी बन गई है।ये सब लोगों के नजर के सामने होता है,लेकिन लोग चुप रहने में अपनी भलाई समझते हैं,क्योंकि इस बीच बोल कर वैसे लोगों से उलझना नहीं चाहते।





बता दें कि बरही में चुंगी वसूली से सरकार को लाखों रूपये की राजस्व की प्राप्ति होती है। इसके अलावा बरही चारों रोड में यात्री बस और अन्य वाहनों के ठहराव से वसूली रकम यहां के एजेंटों को जेब में जाती है। यहां तक कि यहां बड़े व्यवसायिक दुकानें हो या फुटकार और सब्जी की दुकानें हो, बरही चौक की सफाई से कोई मतलब नहीं रहा है।आखिर शासन,प्रशासन,सामाजिक लोग या फिर जन प्रतिनिधियों को इस पर ध्यान क्यों नहीं जा रहा है। कहावत है कि मैं भला तो जग भला, लेकिन सामने आग लगता रहे तो उसे क्या मतलब, जब उनकी घर में आग लगे तो जाने। इतना जरूर देखा जाता है कि अन्य कार्यों में इन सभी का फोटो अखबारों में खूब चमकते हैं, लेकिन बरही की गंदगी उन्हें नजर नहीं आती है। बरहाल बरही चौक की गंदगी यहां का व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रखा है।