उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए 'मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना' के तहत छात्रवृत्ति की सीटें और मिलने वाली आर्थिक सहायता राशि को दोगुना कर दिया है। इस बदलाव से अब प्रदेश के अधिक से अधिक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च कृषि शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

छात्रवृत्ति योजना के मुख्य बिंदु और बदलाव:

  • सीटों में इजाफा: राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की इस योजना के तहत अब कृषि विश्वविद्यालयों व संस्थानों में निर्धारित सीटें 45 से बढ़ाकर 90 कर दी गई हैं। वहीं, कृषि महाविद्यालयों में यह संख्या 15 से बढ़ाकर 30 कर दी गई है।
  • कुल सीटों की संख्या: इन संशोधनों के बाद प्रदेशभर के कुल 11 कृषि विश्वविद्यालयों/संस्थानों और 61 कृषि महाविद्यालयों में छात्रवृत्ति की कुल सीटें 1,410 से बढ़कर 2,820 हो गई हैं।
  • छात्रवृत्ति राशि में बढ़ोतरी: छात्रवृत्ति की मासिक राशि को 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है। इससे विद्यार्थियों को अब सालाना 36,000 रुपये के स्थान पर पूरे 60,000 रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी (प्रत्येक छात्र को 24,000 रुपये की अतिरिक्त वार्षिक सहायता)।

पाठ्यक्रमवार बढ़ी हुई सीटों का विवरण:

  • कृषि विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में:
    • कृषि स्नातक (UG): 25 से बढ़कर 50
    • गृह विज्ञान स्नातक (UG): 6 से बढ़कर 12
    • कृषि स्नातकोत्तर (PG): 10 से बढ़कर 20
    • गृह विज्ञान स्नातकोत्तर (PG): 4 से बढ़कर 8
  • कृषि महाविद्यालयों में:
    • स्नातक स्तर पर: 10 से बढ़कर 20
    • स्नातकोत्तर स्तर पर: 5 से बढ़कर 10
    • (नोट: कृषि के साथ-साथ उद्यान, वानिकी, पशुपालन और उससे जुड़े अन्य विषयों के छात्र भी इस योजना में शामिल हैं।)

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योजना का लाभ और पात्रता:

  • किसे मिलेगा लाभ: यह छात्रवृत्ति उत्तर प्रदेश के मूल निवासी किसानों और खेतिहर मजदूरों के पुत्र-पुत्रियों तथा उन पर पूरी तरह आश्रित विद्यार्थियों को प्रदान की जाती है।
  • योग्यता और चयन:
    • स्नातक (UG) स्तर के लिए: यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट में कम से कम 70% अंक या अन्य बोर्ड से न्यूनतम 85% अंक होना अनिवार्य है।
    • स्नातकोत्तर (PG) स्तर के लिए: स्नातक की परीक्षा में कम से कम 70% अंक जरूरी हैं।
    • विद्यार्थियों का चयन पूरी तरह से मेरिट के आधार पर किया जाता है।

अब तक का सफर

वित्तीय वर्ष 2017-18 से लेकर 2025-26 तक इस योजना के माध्यम से कुल 6,454 मेधावी विद्यार्थियों को लगभग 22.90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति बांटी जा चुकी है। मंडी परिषद के अधिकारियों के अनुसार, इस बढ़ोतरी से आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने में काफी मदद मिलेगी और भविष्य में नए कृषि वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों की पौध तैयार होगी।

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