प्रतापगढ़। राजा भइया और प्रमोद तिवारी के हुए संगम से सत्ताधारी भाजपा की बोलती बंद हो गई है,या यू कहा जाए जबान पर बड़ा वाला ताला लटक रहा है।जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा और सपा को करारी शिकस्त देने के लिए दोनों दिग्गज एक हो गये है। उत्तर प्रदेश के बड़के जिले प्रतापगढ़ की प्रदेश की सियासत में अलग और अहम भूमिका होती है।सरकार चाहे जिस पार्टी की हो मुख्यमंत्री चाहे जो हो लेकिन उसकी खास नजर प्रतापगढ़ पर ही टिकी रहती है।जिले में दो राजनीतिक नाम हमेशा जबरदस्त तरीके से सक्रिय रहे है।एक कुंडा और बाबागंज विधानसभा में शेर की तरह अपनी मजबूत पकड़ के दम पर राजनीति करते आये है तो दूसरा नाम रामपुरखास विधानसभा से राजनीति की शुरूआत कर अपना नाम पैदा किया है। जिले की रामपुरखास विधान सभा सीट को बचाने के लिए भले ही उत्तर प्रदेश से कांग्रेस आई सुनामी में बह गयी हो लेकिन प्रमोद तिवारी रामपुरखास विधानसभा से कांग्रेस से लगातार नौ बार जीत का डंका बजाकर कर विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रचा डाला।प्रमोद तिवारी ने रामपुरखास विधानसभा को समय से अपना उत्तराधिकारी निर्वाचित करवा कर खुद समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के रहमो करम पर सपा कोटे से कांग्रेस में रहते हुए राज्यसभा तक फेरी लगाकर आये। प्रमोद तिवारी को कांग्रेस भले ही राज्यसभा नही भेज पायी हो लेकिन अपनी बुद्धि और सेटिंग के बलबूते पर केंद्र में राजनीति की शुरूआत तिवारी कर लिए। 1993 में सबसे कम उम्र में भदरी राजघराने से कुंडा से रघुराज प्रताप सिंह राजा भइया निर्दलीय विधायक बनकर राजनीति के पारी की जबरदस्त शुरुवात की।राजा भइया कुंडा के अलावा बाबागंज विधानसभा सीट पर अपना कब्जा जमाए हुए हैं।कुंडा और बाबागंज विधानसभा क्षेत्र की राजनीति के सहारे क्षेत्र पंचायत के प्रमुख पद पर कब्जा करना,जिला पंचायत सदस्य के बल पर जिला पंचायत अध्यक्ष पर वर्ष-1995 से लेकर वर्ष-2010 तक रघुराज प्रताप सिंह राजा भइया का ही कब्जा रहा भले ही वे निर्दलीय विधायक रहते है। बाबागंज विधानसभा क्षेत्र में आने वाली सभी क्षेत्र पंचायतों के प्रमुख पद पर राजा भइया के ही आदमियों का कब्जा बरकरार रहा है।कुंडा और मानिकपुर नगर पंचायत में भी राजा भइया का कब्जा बरकरार रहा लेकिन गुलशन यादव और सपा जिलाध्यक्ष छविनाथ यादव के बागी होने के बाद से कुंडा नगर पंचायत के चेयरमैन ने राजा भइया के इच्छाओं के विपरीत गुलशन यादव कुंडा टाउन एरिया का चेयरमैन बने। एक दूसरे से आपसी कलह की वजह से मामला बिगड़ता चला गया।इसका प्रमुख कारण राजा भइया का सपा से खटकना रहा। प्रतापगढ़ जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर सियासी गलियारों से एक बड़ा राजनीतिक संदेश सामने निकल कर आया है।जिले के दो बड़े राजनीतिक दिग्गजों में रघुराज प्रताप सिंह राजा भइया और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने आपस में बड़ी गर्मजोशी के साथ हाथ मिला लिया है।जिले के इन दो राजनीतिक दिग्गजों के मिलन के संगम की शुरूआत लोकसभा और विधानसभा उप चुनाव -2014 में शुरू हुई।दोनों दिग्गजों के मिलन के पीछे प्रमोद तिवारी का स्वार्थ था।रामपुरखास विधानसभा के उप चुनाव में उनकी राजनीतिक उत्तराधिकारी उनकी बड़ी बेटी अराधना मिश्रा मोना के राजनीतिक जीवन की शुरुवात में राजा भइया की तरफ से राजनीतिक विरोध को खत्म कर उसकी जीत की राह को आसान करना रहा। उप चुनाव विधानसभा-2014 के साथ लोकसभा-2014 का सामान्य चुनाव भी हो रहा था और कांग्रेस की उम्मीदवार राजकुमारी रत्ना सिंह निवर्तमान सांसद रही और उन्हें मुख्य विपक्षी दल भाजपा और अपना दल समर्थित उम्मीदवार कुँवर हरिवंश सिंह चुनावी मैदान में थे।जिले के दोनों राजनीतिक दिग्गज प्रमोद तिवारी और राजा भइया में एक टेबल पर गोपनीय समझौता हो गया और इस तरह अराधना मिश्रा मोना कांग्रेस से रामपुरखास विधान सभा का उप चुनाव जीत कर विधायक बन गई और वहीं कांग्रेस की उम्मीदवार राजकुमारी रत्ना सिंह लोकसभा चुनाव में अपनी जमानत तक भी न बचा सकी। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए शनिवार 26 जून को जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी से जिला पंचायत अध्यक्ष पद की उम्मीदवार माधुरी पटेल ने नामांकन किया जिसमें जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के नेताओं के साथ कांग्रेस पार्टी और प्रमोद तिवारी के समर्थक भारी संख्या में खुलकर सामने आए। यहां तक कि नामांकन दाखिल कराने के लिए प्रमोद तिवारी के प्रतिनिधि भगवती प्रसाद तिवारी खुद मौजूद रहे। राजा भइया की पार्टी के वरिष्ठ नेता बब्लू सिंह ने मीडिया के सामने साफ कहा कि राजा भइया और प्रमोद तिवारी की कृपा से माधुरी पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भारी बहुमत से विजयी होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनका किसी भी दल से कोई मुकाबला नहीं है। उनके पास 45 से लेकर करीब 50 की संख्या में जिला पंचायत सदस्यों का समर्थन हासिल है। 3 जुलाई को ये साफ हो जाएगा कि बहुमत किसके साथ है।सबसे मजेदार बात ये है कि सत्ताधारी दल भाजपा के पास महज 7 जिला पंचायत सदस्य ही हैं और मुख्य विपक्षी दल सपा के पास सबसे अधिक 17 जिला पंचायत सदस्य हैं। लोकसभा चुनाव -2019 से पहले स्थापित हुई जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के पास 12 जिला पंचायत सदस्य हैं। इस तरह 57सदस्यों वाली जिला पंचायत में पूर्ण बहुमत किसी के पास नहीं है। सभी को जिला पंचायत सदस्यों को मैनेज करना होगा वो चाहे धन से करें चाहे बाहुबल के दम पर करें तभी जाकर किसी भी दल को बहुमत मिल पायेगा। प्रतापगढ़ मे सबसे खस्ताहाल सपा नजर आ रही है।सपा में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक और भाजपा दोनों सेंधमारी के लिए लगे हैं। जिले में पिछले दो दशक की राजनीति में पहली बार ऐसा दिखायी दे रहा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए तीन उम्मीदवारों ने नामांकन किया हो। इससे पहले सपा और भाजपा ने अपने-अपने उम्मीदवारों का नामांकन कराया है। नामांकन से पहले राजनीति के जानकारों का आंकलन था कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में राजा भइया और प्रमोद तिवारी एक साथ होंगे। अब तक केवल संभावनाएं नजर आ रही थी,परन्तु नामांकन होते ही परिस्थितियां बदल गई। शनिवार को यह पद से साफ हो गया और लोगों के सामने साफ तौर पर दिखाई दिया कि राजा भइया और प्रमोद तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में एक दूसरे से हाथ मिला चुके हैं। अब दोनों दिग्गजों का मुकाबला जिले के अन्य पार्टी के नेताओं के बीच होना है। देखना है कि 3 जुलाई को परिणाम किसके पक्ष में आता है। शनिवार को नामांकन दाखिल कराने के लिए राजा भइया समर्थित प्रत्याशी माधुरी पटेल के साथ जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ कैलाश नाथ ओझा, राजा भइया के प्रतिनिधि हरिओम शंकर श्रीवास्तव, कुंडा के पूर्व ब्लाक प्रमुख बब्लू सिंह समेत तमाम लोग मौजूद रहे।