झारखंड सरकार द्वारा वित्तीय प्रबंधन बेहतर बनाने की दिशा में किए गए प्रयास का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशानुसार झारखंड में वित्त विभाग द्वारा वित्तीय सुधारों के लिए की गई एक नई पहल सराहनीय है। झारखंड सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक से सस्ते कर्ज लिए गए। समय पर पैसा चुका देने से ब्याज की भारी-भरकम राशि का भुगतान नहीं करना पड़ा।
रिजर्व बैंक की योजनाओं का राज्य सरकार ने भरपूर लाभ उठाया। भारतीय रिजर्व बैंक के ऑफर से झारखंड सरकार ने तकरीबन 12 सौ करोड़ रुपए का ऋण लेकर रेपो रेट पर ब्याज भुगतान किया। इससे राज्य सरकार ने करोड़ों रुपए बचा लिए। यह राज्य सरकार के बेहतरीन वित्तीय प्रबंधन का परिचायक है।
इस वित्तीय व्यवस्था का भरपूर इस्तेमाल पूर्ववर्ती सरकारें संभवतः नहीं कर पाई। नई वित्तीय व्यवस्था के तहत झारखंड सरकार ने छोटे-छोटे कर्ज से काम चलाया। ब्याज भी कम देना पड़ा। राज्य सरकार ने छोटे-छोटे कर्ज, छोटी-छोटी अवधि के लिए लेकर 90 दिनों के अंदर कर्ज चुकाने की चुनौती को स्वीकार किया। नतीजतन पूरे वित्तीय वर्ष में 12 सौ करोड़ से अधिक का कर्ज लेने के बावजूद झारखंड सरकार को मात्र 42 लाख रुपए ब्याज के रूप में भुगतान करना पड़ा। यह राज्य सरकार के बेहतरीन वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है। झारखंड सरकार के वित्त विभाग के प्रधान सचिव अजय कुमार सिंह के मुताबिक इस व्यवस्था से बड़े पैमाने पर कर्ज लेने की परंपरा पर भी रोक लगी है। उतना ही कर्ज लिया गया, जितने की जरूरत पड़ी।
गौरतलब है कि रिजर्व बैंक के वेज एंड मींस स्कीम के ऑफर के तहत 90 दिनों के अंदर ऋण चुका देने पर सरकार को रेपो रेट के दर पर ही ऋण प्राप्त होता है। यह व्यवस्था रिजर्व बैंक ने सभी राज्य सरकारों और केंद्रीय उपक्रमों के लिए कर रखा है। इसका इस्तेमाल झारखंड में अब तक नहीं हो पा रहा था।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशानुसार इसकी शुरुआत हुई तो सरकार ने सैकड़ों करोड़ की बचत करने में सफलता पाई।छोटे-छोटे ऋण लेकर राज्य सरकार ने अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा किया और इससे काफी पैसे की बचत की। यह वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में झारखंड सरकार की बेहतरीन पहल है। निश्चित तौर पर इसकी सराहना की जानी चाहिए।





