रांची: देश के रणनीतिक और बेहद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों (Critical Infrastructure) की सुरक्षा को आधुनिक और अचूक बनाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद, आगामी 1 नवंबर 2026 से बल का नया कार्यात्मक ढांचा पूरे देश में प्रभावी हो जाएगा। इस नई व्यवस्था में पारंपरिक क्षेत्रीय सीमाओं के स्थान पर 'सेक्टर आधारित डोमेन विशेषज्ञता' को प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत झारखंड की राजधानी रांची को देश के पूरे कोयला सेक्टर की सुरक्षा का केंद्रीय कमान सेंटर बना दिया गया है।

रांची कमान के पास होगी राष्ट्रीय कोल सेक्टर की कमान

अब तक क्षेत्रीय कामकाज संभाल रहे सीआईएसएफ के ईस्टर्न सेक्टर मुख्यालय, रांची को पूरी तरह से 'राष्ट्रीय कोल सेक्टर' में तब्दील कर दिया गया है।

  • अचूक निगरानी: अब देश भर की तमाम कोयला खदानों, कोल ब्लॉकों और कोयला प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और रणनीतिक कमान सीधे रांची से ही संचालित की जाएगी।
  • हाई-टेक सुरक्षा: कोल सेक्टर की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए रांची कमान के अंतर्गत अत्याधुनिक तकनीकों से लैस विशेष दस्ते तैनात किए जाएंगे। ये दस्ते साइबर सुरक्षा, ड्रोन और एंटी-ड्रोन जैसी आधुनिक प्रणालियों के जरिए कोयला संपत्तियों की पहरेदारी करेंगे।

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अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों का भी हुआ पुनर्गठन

नए ढांचे के तहत देश के अन्य महत्वपूर्ण सेक्टरों को भी नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है:

  • स्टील सेक्टर: भिलाई स्थित सेंट्रल सेक्टर को समर्पित 'स्टील सेक्टर' बनाया गया है।
  • पावर सेक्टर: बिजली प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए नई दिल्ली के नॉर्थ सेक्टर को 'पावर-1' और कोलकाता के नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर-2 को 'पावर-2' सेक्टर में बदला गया है।
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस: गुवाहाटी का नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर अब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सेक्टर के रूप में काम करेगा।
  • पोर्ट सेक्टर (समुद्री सुरक्षा): मुंबई के वेस्टर्न सेक्टर को 'वेस्ट कोस्ट पोर्ट' और चेन्नई के साउथ सेक्टर को 'इस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर' बनाया गया है।
  • सरकारी भवन और मेट्रो: नई दिल्ली के एनसीआर सेक्टर को सरकारी भवनों, संग्रहालयों, स्मारकों और मेट्रो की सुरक्षा के लिए 'जीबीएमएम' व 'एमआरटीएस' सेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है।
  • अन्य जिम्मेदारियां: एयरपोर्ट सेक्टर, परमाणु ऊर्जा व अंतरिक्ष केंद्रों (DAE और DOS) से जुड़े सेक्टर पहले की तरह काम करते रहेंगे। इसके अलावा, सीआईएसएफ को जम्मू-कश्मीर की अति संवेदनशील जेलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों की हवाई सुरक्षा के लिए इसे 'नोडल एजेंसी' बनाया गया है।

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