लखनऊ।समाजवादी पार्टी के विधायक इरफान सोलंकी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में नमाज के लिए अलग कमरे की मांग की थी। इस पर विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि किसी प्रकार का अभी तक कोई प्रार्थना पत्र नहीं मिला है। आपको बता दें कि इससे पहले झारखंड विधानसभा में नमाज अदा करने के लिए एक अलग से कमरे का आवंटन किया गया है और इस पर झारखंड में सियासी तूफान खड़ा हो गया है। झारखंड के बाद अब यूपी में भी कुछ इसी तरह की मांग उठ रही है।कानपुर सपा विधायक इरफान सोलंकी ने मांग की है कि विधानसभा में नमाज के लिए अलग से एक कमरा आवंटित किया जाए। बैरहाल इस पर अब एक नई बहस छिड़ गई है।योगी सरकार के मंत्री साफ तौर पर कह रहे हैं कि इसका कोई सवाल ही नहीं उठता है और ये होना भी नहीं चाहिए।विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित का साफ तौर पर कहना है कि इरफान सोलंकी की तरफ से उनके कार्यालय में न तो कोई प्रार्थना पत्र आया है न ही कोई आवेदन दिया है। आपको बता दें कि सपा विधायक इरफान सोलंकी अपने विवादित बयानों की वजह से सुर्खियों में बने रहते हैं।यूपी 2022 विधानसभा चुनाव के कुछ महीनों पहले सोलंकी के बयान ने यूपी में नई सियासी बहस छेड़ दी है। सोलंकी ने मांग की है कि झारखंड विधानसभा की तरह उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी नमाज के लिए एक कमरा आवंटित कर दिया जाए क्योंकि कई बार विधायकों को नमाज के लिए विधानसभा का सत्र छोड़कर मस्जिद में जाना पड़ता है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष का साफ कहना है कि इरफान सोलंकी ने न ही कोई प्रार्थना पत्र न दिया है न ही कोई प्रत्यावेदन उनके कार्यालय में भेजा है।विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा की अपनी नियमावली होती है, हालांकि कुछ-कुछ चीजें हर विधानसभा में एक जैसी होती हैं। विधानसभा अध्यक्ष का कहा कि अगर कोई प्रार्थना पत्र उनके कार्यालय में आता है तो उसका अवलोकन करेंगे और उस पर परामर्श लेंगे। उसके बाद ही वह इस पर कुछ कहेंगे।विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अभी तक उनके कार्यालय में इस तरह का कोई भी प्रत्यावेदन या आवेदन पत्र नहीं आया है, और बिना इसके अनुमान या कल्पना के आधार पर कोई बयान नहीं देना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष से जब पूछा गया कि क्या विधानसभा की नियमावली में इस तरह से किसी को नमाज के लिए किसी को पूजा के लिए कक्ष आवंटित करने की कोई व्यवस्था है तो साफ तौर पर कहा था कि विधानसभा की नियमावली में इस तरह की कोई भी व्यवस्था नहीं है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री जय प्रताप सिंह ने इरफान सोलंकी की मांग को सिरे से खारिज किया है।जय प्रताप सिंह का कहना है कि इसका तो कोई सवाल ही नहीं उठता और यह होना भी नहीं चाहिए।जय प्रताप सिंह ने साफ तौर पर कह रहे हैं कि विधानसभा में हर जाति धर्म के लोगों का प्रतिनिधित्व है।यहां किसी को नमाज पढ़ने के लिए या पूजा करने के लिए अलग से कमरा देने की कोई आवश्यकता नहीं है और यह होना भी नहीं चाहिए क्योंकि इससे देश के अंदर एक गलत संदेश जाता है।जय प्रताप सिंह ये भी कह रहे है कि शायद झारखंड के मुख्यमंत्री ने किसी दबाव में इस तरह का निर्णय लिया होगा