विश्व स्तनपान सप्ताह पर यूनिसेफ द्वारा कार्यशाला आयोजित





अस्पतालों में स्तनपान नीति पर ध्यान देने की जरूरत : डॉ. राघवेंद्र शर्मा





झारखंड में पिछले पांच वर्षों में कुपोषण दर में आई कमी





विशेष संवाददाता,रांची। विश्व स्तनपान सप्ताह (1-7 अगस्त) पर यूनिसेफ द्वारा विशेष रूप से स्तनपान के महत्व और इससे संबंधित जागरूकता पर गुरुवार को होटल कैपिटोल हिल में एक दिवसीय कार्यशाला सह मीडिया ब्रीफिंग का आयोजन किया गया। कार्यशाला में चिकित्सा क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ-साथ स्वास्थ्य अधिकारियों, प्रतिभागियों और समुदाय के सदस्यों के अलावा मीडियाकर्मियों ने हिस्सा लिया।





यूनिसेफ के मुताबिक इस वर्ष के विश्व स्तनपान सप्ताह का थीम माताओं के लिए एक सक्षम और अनुकूल वातावरण बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है, ताकि वे अपने बच्चों को अस्पताल, घर व कार्यस्थलों पर बिना किसी समस्या के स्तनपान करा सकें।





इस अवसर पर डॉ.राघवेंद्र शर्मा, उप निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं सह नोडल अधिकारी, बाल स्वास्थ्य (झारखंड) ने स्तनपान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इस दिशा में राज्य सरकार की पहल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में स्तनपान नीति पर सख्ती से ध्यान केंद्रित करना चाहिए और नर्सों को इसके बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। यह भी महत्वपूर्ण है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ-साथ विज्ञापन कंपनियां, समुदाय के सदस्य तथा मीडिया इसे कार्यान्वित करने में अपनी भूमिका अदा करें। हमें सामान्य परिस्थितियों में शिशु दूध के विकल्प, फीडिंग बॉटल्स तथा शिशु दूध के उत्पादों को कभी भी बढ़ावा नहीं देना चाहिए।





जन्म के पहले घंटे के भीतर विशेष स्तनपान कराना जरूरी: आस्था





यूनिसेफ की कम्यूनिकेशन एडवोकेसी एवं पार्टनरशिप स्पेशलिस्ट आस्था अलंग ने कहा कि स्तनपान सप्ताह, दुनिया भर में मनाया जाने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम है, जो कि सामूहिक प्रयासों के माध्यम से स्तनपान के प्रति जागरूकता, इसके प्रचार-प्रसार एवं प्रोत्साहन देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस वर्ष के स्तनपान सप्ताह का थीम कामकाजी माता-पिता के लिए स्तनपान को प्रोत्साहन तथा जन्म के पहले घंटे के भीतर विशेष स्तनपान जरूरी है।





स्तनपान मां से नवजात शिशु को सुरक्षात्मक एंटीबॉडी प्रदान करता है : प्रीतीश नायक





यूनिसेफ के पोषण विशेषज्ञ प्रीतीश नायक ने कहा कि बच्चों, माताओं तथा समाज के लिए स्तनपान के लाभ व्यापक हैं। स्तनपान मां से नवजात शिशु को सुरक्षात्मक एंटीबॉडी प्रदान करता है और शिशुओं को जीवन-घातक संक्रमणों से बचाता है। इसके अलावा बच्चों में स्वस्थ मस्तिष्क के विकास को बढ़ाने तथा तीव्र एवं बचपनजनित बीमारियों को रोकने में भी सहायता करता है।





इस अवसर पर यूनिसेफ के पोषण विशेषज्ञ, डॉ.बनेश माथुर, स्वास्थ्य अधिकारी, यूनिसेफ अकाई मिंज, राज्य कार्यक्रम समन्वयक एवं एसपीएम एनएचएम. झारखंड, सुधादेवी एम. प्रिंसिपल, कॉन, रिम्स, रांची, डॉ.किरण त्रिवेदी, स्त्री रोग विभाग, रिम्स, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनीता कात्यायन सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारी भी उपस्थित थे।





स्तनपान पर विशेष परिचर्चा में एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया





कार्यशाला में स्तनपान पर आयोजित विशेष परिचर्चा में जिरेन एस. कंडुन्ना, अस्पताल प्रबंधक, सदर अस्पताल रांची, शेरिन ऐनी राजू कार्यकारी सहयोगी यूनिसेफ, डोरोथी किपोथी, जीएनएम प्रसूति वार्ड, सदर रांची, बबीता मंडल, एएनएम, प्रसूति वार्ड, सदर रांची और आशा कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया तथा स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों, कार्यस्थलों और समुदायों में प्रारंभिक स्तनपान शुरुआत के बारे में अपने अनुभव साझा किए। परिचर्चा में शिशु के माता-पिता ने भी स्तनपान की महत्ता पर प्रकाश डाला।