वरीय संवाददाता,रांची। अमर शहीद शेख भिखारी स्मारक समिति के तत्त्वावधान में गुरुवार को शहीद शेख भिखारी चौक में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनकी 114वीं जयंती मनायी गई।मौके पर मुख्य अतिथि झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक एवं प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि संघर्ष से ही नई इबारत लिखी जा सकती है। इसलिए अपनी पहचान और अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए निरंतर संघर्षरत रहना जरूरी है।
मौके पर मुख्य वक्ता आंदोलनकारी भुवनेश्वर केवट ने कहा कि अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष का मार्ग चुनें। हमारे इतिहास को मिटाने की साजिश की जा रही है। इसलिए साजिशकर्ता लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।
कार्यक्रम का संचालन व विषय प्रवेश करते हुए स्मारक समिति के राजेंद्र कुमार महतो ने शेख भिखारी की जीवनी पर प्रकाश डालकर उनके संघर्ष और सहादत की गाथा की चर्चा की।राजी पड़हा समिति के सचिव रंजीत उरांव ने कहा कि शेख भिखारी का संघर्ष का पथ हमें प्रेरित करता है कि वर्तमान समय में खुशहाल एवं समतामूलक समाज बनाने के लिए एक और उलगुलान करना है ।
राजी पड़हा समिति के पहान विकास कुमार कच्छप ने कहा कि भारतीय इतिहास के स्वतंत्रता संग्राम में झारखंड के स्वतंत्रता वीरों का नाम स्वर्णिम अक्षरों में होना चाहिए था, लेकिन आज इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गया है।उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए।कार्यक्रम की अध्यक्षता मैजूल हक ने की। लोक गायक जफर खान ने शोषण के मारु तीर उलगुलान के गीत से कार्यक्रम का आगाज किया।
मौके पर आनंद तांबा, सनी खलखो, हाजी इनामुल हक, जितेंद्र कुमार सिंह, गोसला गाड़ी सहित अन्य वक्ताओं ने शेख भिखारी के बताए पथ पर चलने की अपील की।





