पटना/नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बक्सर से सांसद और बिहार के पूर्व मंत्री सुधाकर सिंह को बिहार के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी द्वारा 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजे जाने के बाद राज्य में सियासत गरमा गई है। सांसद ने इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने और जांच कराने का आग्रह किया है। उन्होंने पत्र का स्क्रीनशॉट अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर भी साझा किया है।

क्या है पूरा मामला?

बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के महानिदेशक (DG) कुंदन कृष्णन ने राजद सांसद सुधाकर सिंह को मानहानि का नोटिस भेजा है। पीटीआई (PTI) के मुताबिक, नोटिस में कहा गया है कि यदि सांसद निर्धारित समय-सीमा के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो उनके खिलाफ मानहानि का दीवानी व आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा और ₹5 करोड़ के हर्जाने की मांग की जाएगी।

इस नोटिस के सामने आने के बाद सुधाकर सिंह ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर सीधे सवाल उठाया कि क्या एक सेवारत आईपीएस अधिकारी द्वारा भेजा गया यह नोटिस राज्य सरकार की आधिकारिक मंजूरी से भेजा गया है या नहीं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से विशेषाधिकार हनन की जांच की मांग

सांसद सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया है कि वह इस बात की जांच कराने का निर्देश दें कि कहीं यह कानूनी नोटिस एक जनप्रतिनिधि और संसद सदस्य के रूप में उनके संवैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालने का प्रयास तो नहीं है।

सुधाकर सिंह ने कहा:

  • विशेषाधिकार समिति को भेजा जाए मामला: यदि जांच में सांसद के अधिकारों का हनन पाया जाता है, तो इस मामले को तुरंत संसद की 'विशेषाधिकार समिति' (Privilege Committee) के पास भेजा जाना चाहिए।
  • निजी लॉ फर्म की भूमिका पर सवाल: सांसद ने नोटिस के तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जिस भाषा और प्रारूप में नोटिस जारी किया गया है, उससे प्रतीत होता है कि एक निजी विधि फर्म (Law Firm) राज्य सरकार के वकील की भूमिका निभा रही है।

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'संसद की गरिमा और सदस्यों की स्वतंत्रता की रक्षा करें अध्यक्ष'

सुधाकर सिंह ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि नियम के अनुसार राज्य सरकार की ओर से केवल महाधिवक्ता (Advocate General) या राज्य द्वारा नियुक्त अधिकृत विधि अधिकारी ही इस प्रकार की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं।

उन्होंने मांग की कि इस संबंध में लोकसभा सचिवालय को बिहार सरकार से तुरंत स्पष्टीकरण मांगना चाहिए। सांसद ने विश्वास जताया कि संसद की गरिमा और उसके सदस्यों की स्वतंत्रता के संरक्षक के रूप में लोकसभा अध्यक्ष इस मामले की संवेदनशीलता को समझेंगे और त्वरित व उचित कार्रवाई करेंगे।

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