प्रतिनिधि ,सिंदरी। अतिक्रमण हटेगा या नहीं, क्या जिनको हटाया जाएगा, क्या उन्हें बसाया भी जाएगा, पिछले लगभग 40-45 दिनों से चर्चा गर्म है। शहर के सक्रिय राजनीतिज्ञों से लेकर गुमसुदगी से वापस आए सभी सिंदरी को बचाने की अथक प्रयास कर रहे हैं। उन्हीं में से कुछ नेता प्रबंधन से प्रभावित तो कुछ विरोधी वक्तब्य देते सड़क पर नजर आ जाएंगे।





पूर्वांचल सूर्य से सुरेंद्र सिंह शेखावत की अतिक्रमण से संबंधित एवं पीड़ितों के बसाए जाने के मुद्दे पर बात हुई। श्री शेखावत ने कहा कि सिंदरी बसेगा, उजड़ेगा नहीं पर कोई भी कंपनी एक सिस्टम से चलती है। सिस्टम कहता है कि शहर के रोड़ के किनारों के अतिक्रमित क्षेत्र दुकान एवं मकान हट जाने से शहर की सुंदरता बढ़ेगी एवं उसे उन्नत करने की कोशिश भी है। शहर के किनारों से अतिक्रमण हटने से रोड़ की चौड़ीकरण एवं किनारों में फूल आदि के होने से प्राकृतिक सुंदरता बढ़ेगी एवं प्रदूषण भी कम होगा। बाजार का अतिक्रमण के हटने से वाहन के आवागमन में फिलहाल जो दिक्कतें आ रही है वो बिल्कुल खत्म हो जाएगा। उसके बाद वाहन के पार्किंग एवं पैदल चलने वालों के लिए समुचित स्थान मिल जाएगा।





श्री शेखावत ने बताया कि ना ही केंद्र सरकार और ना ही राज्य सरकार अतिक्रमण हटाने की पेशकश की है। ये एफसीआईएल की कंपनी का निर्णय है। हां एफसीआईएल की जमीन केंद्र के नाम है और जो प्रधानमंत्री चाहेंगे वो होगा, पर अभी तक केंद्र की कोई मनसा लोगों को हटाने की नहीं है, बल्कि ये कंपनी की जरूरत है। एफसीआईएल की ये भी मनसा नहीं है कि सभी गरीबों को सड़क पर ला दिया जाए, पर अतिक्रमण करने वालों की मर्जी भी नहीं चलेगी, बल्कि उन्हें जहां भी बसाया जाएगा, वहां जा कर बसना होगा पर ये भविष्य में होगा।





इस बाबत जब सिंदरी चेंबर के अध्यक्ष दीपक कुमार दीपू से बात हुई तो उन्होंने श्री शेखावत के बयान का स्वागत किया, श्री दीपू ने बताया कि दुकानदारों को कम-से-कम डेढ़ सौ स्क्वायर फीट की दुकान दिया जाए, जो दुकान आवंटन किया जाए वह उसी क्षेत्र में हो जिन क्षेत्र में वह पहले से व्यवसाय कर रहे हैं।झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले जो लोग विस्थापित हो रहे है उन्हे एफसीआईएल एक प्लॉट दे या राज्य सरकार से जमीन दिया जाए, उनको केंद्र सरकार के द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बसाया जाए।प्रधानमंत्री आवास योजना में जमीन होना जरूरी होता है। लाभार्थी के पास चुकी यहां जमीन इनके पास नही है इसलिए जमीन एफसीआईएल या राज्य सरकार दे और इनका पुनर्वास हो।आवासों का भी आवंटन नियमित रूप से कर दिया जाए। जैसे कि वीआरएस कर्मियों को लीज रेंट पर दिया गया है। इसमें उन लोगों को प्राथमिकता दिया जाए जिनका सिंदरी से परोक्ष और अपरोक्ष रूप से नाता हो। जैसे पूर्व कर्मियों और उनके परिवार के लोगों को आवंटित किया जाए, जो सिंदरी में पूर्व से ही रह रहे हैं। साथ ही व्यवसायियों , स्कूल, कॉलेज, बैंक ,पोस्ट ऑफिस, एलआईसी, सरकारी और गैर सरकारी संस्थान के कर्मचारियों, पत्रकारों, वकीलों और ऐसे लोगों को जिनका सिंदरी शहर से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में कोई नाता हो और यहां कई सालों से रह रहे हों। अगर क्वाटर की कमी हो तो जमीन का आवंटन दिया जाए ताकि बोकारो के तर्ज पर कोऑपरेटिव कॉलोनी जैसी कॉलोनी बसाया जा सके।