नई दिल्ली

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर विपक्षी दलों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर चुनाव आयोग (ECI) ने अपना जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में दिए गए इस हलफनामे में चुनाव आयोग ने याचिका को पूरी तरह एक न्यूज रिपोर्ट पर आधारित बताते हुए खारिज करने की मांग की है।

इसके साथ ही, आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने या उनके कामकाज पर रोक लगाने संबंधी मांग का पुरजोर विरोध किया है।

तीनों सदस्यों की सहमति से दाखिल हुआ हलफनामा

चुनाव आयोग ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि यह हलफनामे की प्रति आयोग के तीनों सदस्यों (CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों) की पूर्ण सहमति के बाद ही दाखिल की गई है।

हलफनामे की मुख्य बातें:

  • सर्वसम्मत फैसले: SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी आदेश आयोग द्वारा सर्वसम्मति से पारित किए गए थे।
  • अंतिम फैसला क्या है? फाइल पर किसी एक चुनाव आयुक्त या CEC द्वारा दर्ज की गई व्यक्तिगत टिप्पणी/सुझाव को आयोग का अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता, जब तक कि उस पर अंतिम सहमति न बने।
  • फाइल मूवमेंट की प्रक्रिया: कोई भी प्रशासनिक फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त के पास जाती है। आपात या जल्दबाजी की स्थिति में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मंजूरी ली जाती है, जिसे बाद में आधिकारिक फाइल पर दर्ज किया जाता है।
  • अधिकार क्षेत्र से बाहर काम करने पर कार्रवाई: यदि कोई अधिकारी अपने निर्धारित अधिकारों से परे जाकर कोई आदेश जारी करता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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फॉर्म-6 में बदलाव के आरोपों पर सफाई

फॉर्म-6 (नए मतदाताओं का नाम जोड़ने संबंधी फॉर्म) में फेरबदल के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया:

  • केंद्र सरकार का अधिकार: फॉर्म-6 में संशोधन करने का सर्वाधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, आयोग ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है। SIR प्रक्रिया के तहत मतदाताओं से लिया जाने वाला घोषणा-पत्र (Declaration Form) एक पूरी तरह से अलग दस्तावेज है।
  • 28 जुलाई का आदेश रद्द: काम के बंटवारे से जुड़ा 28 जुलाई का आदेश प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आए एक अतिरिक्त सचिव द्वारा जारी किया गया था। दोनों चुनाव आयुक्तों के संयुक्त निर्देश और कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र के बाद 30 जुलाई को ही इस आदेश को निष्प्रभावी कर दिया गया था।
  • ऑनलाइन व्यवस्था में सुधार: ऑनलाइन फॉर्म देखने पर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी, इसलिए 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन को भी कागजी स्वरूप की तरह फॉर्म-6 और 'घोषणा पत्र' दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर दिया गया है।

BLO घर-घर जाकर जुटाएंगे दस्तावेज, IIT विशेषज्ञों की कमेटी गठित

मतदाताओं की सुविधा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग ने कोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे:

  1. सुनवाई का नियम: जिन मतदाताओं के नाम पुराने रिकॉर्ड से मैच नहीं हो पाए हैं, उन्हें सीधे दफ्तरों में सुनवाई के लिए बुलाना अनिवार्य नहीं है।
  2. BLO की जिम्मेदारी: बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) स्वयं ऐसे मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे। केवल विशेष परिस्थितियों में ही व्यक्तिगत या ऑनलाइन सुनवाई होगी।
  3. ERO की मंजूरी अनिवार्य: इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के आधिकारिक आदेश के बिना किसी भी मतदाता का नाम न तो जोड़ा जा सकता है और न ही हटाया जा सकता है।
  4. IIT विशेषज्ञों की समिति: नियमों और तकनीकी प्रक्रियाओं के सही पालन की जांच के लिए IIT के तकनीकी विशेषज्ञों की एक विशेष समिति का गठन किया गया है।

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग ने अपनी किसी भी आंतरिक फाइल या नोट को मीडिया में जारी नहीं किया है। शीर्ष अदालत से निवेदन करते हुए आयोग ने कहा कि यह केवल एक संक्षिप्त जवाब (Brief Affidavit) है और विस्तृत हलफनामा पेश करने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया जाए।

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