नई दिल्ली। आजादी के 79 वर्षों में भारत ने खेलों की दुनिया में एक खास मुकाम हासिल किया है। आज भले ही क्रिकेट विश्व कप से लेकर ओलंपिक स्वर्ण पदक तक भारतीय खिलाड़ी तिरंगे का मान बढ़ा रहे हैं, लेकिन भारतीय खेल इतिहास की मजबूत नींव 15 अगस्त 1947 से पहले ही रखी जा चुकी थी। आजादी से पहले अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करने वाले 5 महान खिलाड़ियों का योगदान अतुलनीय है:
1. नॉर्मन प्रिचार्ड (एथलेटिक्स)
- उपलब्धि: ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने और पदक जीतने वाले पहले एथलीट।
- योगदान: 1900 पेरिस ओलंपिक में 200 मीटर स्प्रिंट और 200 मीटर हर्डल्स में दो रजत (सिल्वर) पदक जीते। 121 वर्षों बाद नीरज चोपड़ा ने पेरिस/टोक्यो के इस सिलसिले को एथलेटिक्स स्वर्ण में बदला।
2. मेजर ध्यानचंद (हॉकी)
- उपलब्धि: विश्व हॉकी के सर्वकालिक महानतम खिलाड़ी।
- योगदान: 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में भारत को लगातार 3 स्वर्ण पदक दिलाए। 1936 बर्लिन ओलंपिक के फाइनल में तानाशाह हिटलर के सामने जर्मनी के खिलाफ हैट्रिक जमाकर भारत को 8-1 से ऐतिहासिक जीत दिलाई थी।
3. कर्नल सीके नायडू (क्रिकेट)
- उपलब्धि: भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम के पहले कप्तान।
- योगदान: 1932 में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए भारत के पहले आधिकारिक टेस्ट मैच में कप्तानी की। अपने प्रथम श्रेणी (First-Class) करियर में 11,000 से अधिक रन (26 शतक) बनाए और 411 विकेट झटके।
4. लाला अमरनाथ (क्रिकेट)
- उपलब्धि: टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले प्रथम भारतीय बल्लेबाज।
- योगदान: 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ बॉम्बे टेस्ट में डेब्यू करते हुए 118 रनों की यादगार पारी खेली। आगे चलकर वे आजाद भारत की पहली टेस्ट टीम के कप्तान भी बने।
5. कैप्टन रूप सिंह (हॉकी)
- उपलब्धि: मेजर ध्यानचंद के छोटे भाई और ओलंपिक में एक मैच में सर्वाधिक गोल का विश्व रिकॉर्ड।
- योगदान: 1932 (लॉस एंजिल्स) और 1936 (बर्लिन) ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता टीम के मुख्य स्तंभ। 1932 में अमेरिका के खिलाफ 24-1 की जीत में अकेले 10 गोल दागे थे, जो आज भी ओलंपिक इतिहास का रिकॉर्ड है।





