राहुल गांधी ने खुद को मूर्ख साबित किया': एपस्टीन फाइल्स विवाद पर हरदीप पुरी का पलटवार
नई दिल्ली |केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 'एपस्टीन फाइल्स' को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। NDTV को दिए एक विशेष साक्षात्कार में पुरी ने स्पष्ट किया कि दिवंगत अमेरिकी अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ उनकी मुलाकातें पूरी तरह पेशेवर थीं और राहुल गांधी के "सरेंडर" वाले दावे बेबुनियाद हैं।
"असहज महसूस कर रहा था, मुलाकातें अरेंज की गई थीं"
हरदीप पुरी ने स्वीकार किया कि वे अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान (IPI) के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में एपस्टीन से तीन-चार बार मिले थे। उन्होंने कहा:
"मैं एपस्टीन से मिलने का इच्छुक नहीं था, ये मुलाकातें अरेंज की गई थीं। उस समय मुझे उनके आपराधिक इतिहास की जानकारी नहीं थी। मिलने के बाद जब हमें संदेह हुआ, तब हमने गूगल पर उनके बारे में सर्च किया था।"
पुरी ने राहुल गांधी के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने एपस्टीन फाइल्स के दबाव में अमेरिका के साथ ट्रेड डील में 'सरेंडर' कर दिया। पुरी ने कहा कि उस वक्त वे सरकार का हिस्सा भी नहीं थे, इसलिए ऐसे आरोप हास्यास्पद हैं।
ईमेल और 'एग्जॉटिक आइलैंड' पर सफाई
2014-15 के बीच एपस्टीन को भेजे गए ईमेल में 'एग्जॉटिक आइलैंड' (Exotic Island) और 'हैव फन' (Have Fun) जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर पुरी ने कहा कि यह उनके बात करने का सामान्य तरीका है।
पुरी का तर्क: "मैं 'हैव फन' मुहावरा लगभग हर किसी के साथ इस्तेमाल करता हूँ। इसे गलत संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। मेरा उद्देश्य भारत के अवसरों के बारे में किताबें देना और पेशेवर चर्चा करना था।"
अनिल अंबानी का मामला: राहुल गांधी द्वारा लगाए गए उस आरोप को भी उन्होंने नकारा जिसमें कहा गया था कि पुरी ने ही अनिल अंबानी को एपस्टीन से मिलवाया था।
राहुल गांधी के संसद में आरोप
इससे पहले बुधवार को राहुल गांधी ने लोकसभा में दावा किया था कि एपस्टीन फाइल्स में हरदीप पुरी का नाम शामिल है और उन्होंने ही अनिल अंबानी को एपस्टीन के नेटवर्क से जोड़ा था। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सोशल मीडिया पर कुछ स्क्रीनशॉट्स साझा कर दावा किया था कि अनिल अंबानी ने ट्रंप प्रशासन के करीबियों से मिलने के लिए एपस्टीन की मदद मांगी थी।
"30 लाख ईमेल में सिर्फ 4 मुलाकातें"
पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत रहने के दौरान (2009-2017) के उनके करीब 30 लाख ईमेल जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा, "इतने विशाल डेटा में केवल तीन या चार बैठकों का जिक्र है, जो मेरी बेदाग छवि और पेशेवर आचरण को दर्शाता है।"
मुख्य बिंदु:
पुरी ने एपस्टीन से मुलाकातों को 'प्रोफेशनल' और 'अनचाही' बताया।
राहुल गांधी के आरोपों को राजनीतिक हताशा करार दिया।
IPI डेलिगेशन के दौरान हुई मुलाकातों पर दी सफाई।





