नई दिल्ली | केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर जारी किए गए नए और सख्त दिशानिर्देशों ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां सरकार इसे राष्ट्रगान के समान सम्मान देने की पहल बता रही है, वहीं प्रमुख मुस्लिम और सिख संगठनों ने इसे अपनी धार्मिक मान्यताओं और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ करार दिया है।

क्या है सरकार का नया आदेश?

गृह मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के सभी 6 अंतरे (छंद) गाना अनिवार्य होगा, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी। अब तक औपचारिक रूप से केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।

अनिवार्य सम्मान: राष्ट्रगीत बजते समय हर व्यक्ति को 'सावधान' की मुद्रा में खड़ा होना होगा।

नया प्रोटोकॉल: यदि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत एक साथ होने हैं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा।

संदर्भ: यह निर्णय वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में लिया गया है।

"अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं": जमीयत उलेमा-ए-हिंद

जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सरकार के इस फैसले को "एकतरफा और मनमाना" बताया है। उन्होंने 'X' पर पोस्ट कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई:

"मुसलमान किसी को वंदे मातरम गाने से नहीं रोकते, लेकिन इसके कुछ छंद मातृभूमि को देवता के रूप में पूजने की बात करते हैं। एक मुसलमान सिर्फ अल्लाह की इबादत करता है। इसे थोपना संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन है।"

मदनी ने आगे कहा कि देशभक्ति का पैमाना नारों में नहीं, बल्कि बलिदानों में होता है और यह आदेश बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक "चुनावी राजनीति" है।

पर्सनल लॉ बोर्ड और सिख संगठनों की चेतावनी

AIMPLB: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस नोटिफिकेशन को "गैर-कानूनी" बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया, तो इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी।

दल खालसा: पंजाब के सिख संगठन 'दल खालसा' ने भी इसका पुरजोर विरोध किया है। नेता कंवरपाल सिंह बिट्टू ने कहा, "यह भारतीयता के नाम पर हिंदुत्व की विचारधारा थोपने का प्रयास है, जिसे सिख समुदाय स्वीकार नहीं करेगा।"

मुख्य विवाद के बिंदु

विषयनया नियमविरोध का कारण
अवधि3 मिनट 10 सेकंड (सभी 6 छंद)धार्मिक मान्यताओं (मूर्ति पूजा का संदर्भ) के विपरीत।
मुद्राखड़ा होना अनिवार्यव्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक पहचान पर प्रहार।
वरीयताराष्ट्रगान से पहले गायनसंवैधानिक और स्थापित परंपराओं में बदलाव।

सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य राष्ट्रगीत को वह गौरव दिलाना है जिसका वह हकदार है, जबकि विपक्षी संगठनों का तर्क है कि एकता थोपी नहीं जा सकती, वह स्वतः स्फूर्त होनी चाहिए।