बाराबंकी/नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर 'मंदिर-मस्जिद' और भाषाई मर्यादा को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। बाराबंकी की एक जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े तेवरों ने जहाँ सियासी पारा बढ़ा दिया है, वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उनके शब्दों के चयन पर तंज कसते हुए भाजपा की राजनीति को 'सांप्रदायिक' करार दिया है।
सीएम योगी का कड़ा संदेश: "कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे"
बाराबंकी में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट और सख्त लहजे में कहा कि अब बाबरी मस्जिद का सपना देखना व्यर्थ है। उनके संबोधन के मुख्य अंश:
मस्जिद पर बयान: "बाबरी मस्जिद अब कभी भी नहीं बनने वाली है। जो लोग कयामत के दिन आने का सपना देख रहे हैं, वह दिन कभी नहीं आएगा।"
कानून की चेतावनी: "हिंदुस्तान में कायदे से रहना सीखो। कानून मानोगे तो फायदे में रहोगे, वरना आगे का रास्ता सीधा जहन्नुम जाता है।"
विरासत पर गर्व: सीएम ने 500 वर्षों के बाद अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को गौरवपूर्ण क्षण बताया और पिछली सरकारों पर राम की उपेक्षा का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव का पलटवार: "उर्दू से दिक्कत है, तो कयामत क्यों?"
मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार करने में अखिलेश यादव ने भी देरी नहीं की। नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने भाजपा पर डर की राजनीति करने का आरोप लगाया।
भाषाई तंज: अखिलेश ने कहा, "मेरी अपील है कि मुख्यमंत्री जी को अगर उर्दू से इतनी दिक्कत है, तो वह 'कयामत' और 'जहन्नुम' जैसे उर्दू शब्दों का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं? उन्हें कोई और शब्द ढूँढना चाहिए।"
सत्ता का डर: सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि जब भी भाजपा को सत्ता जाने का डर सताता है, वह सांप्रदायिक कार्ड खेलने लगती है।
चुनावी आहट और ध्रुवीकरण की राजनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के इस दौर में इस तरह की बयानबाजी आने वाले चुनावों के लिए जमीन तैयार कर रही है। एक तरफ जहाँ योगी आदित्यनाथ 'विरासत' और 'कानून व्यवस्था' के जरिए अपने कोर वोट बैंक को एकजुट कर रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव इसे विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बता रहे हैं।
सियासी गलियारों की हलचल: उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस विवाद में कूदते हुए अखिलेश यादव को 2017 से पहले का 'गुंडाराज' याद दिलाया, जिससे स्पष्ट है कि यह जुबानी जंग अभी और लंबी खिंचने वाली है।





