प्रतिनिधि,सिंदरी/बलियापुर। भारत के नवरत्न कंपनियों में से एक सेल, हर्ल, एसीसी, एफसीआईएल, बीआईटी आदि जैसे संस्थानों से परिपूर्ण सिंदरी और आसपास के लोग पिछले 21 वर्षों से स्वास्थ के मामले में भेंटीलेटर पर है। सिंदरी और इसके आसपास लगभग 2 लाख की आबादी है, जो लगभग डॉ. विहीन है। सभी संस्थाएं बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, पर उनके कथनी और करणी में धरती और आसमान का फर्क है।
एसीसी कंपनी जिसका तीसरा यूनिट भी कुछ दिनों में पूर्ण हो जाएगा पर सीएसआर फण्ड के रूप में अपना एक छोटा सा दायरा सुनिश्चित कर बस उसी के इर्दगिर्द कार्य करती है। उसी के ढर्रे पर हर्ल भी चलती हुई जर्जर पानी टंकी के अंदर विश्व का पहला अनोखा, अविष्मरणी और अतिश्योक्ति पूर्ण कार्य करते हुए स्वास्थ केंद्र खोल, जिसका उद्घाटन खुद हर्ल के देवाशीष नंदा और एमडी एस सी मुदगेरिक ने की, जो आश्चर्य की बात है। उसके बाद हर्ल प्रबंधन ने कहा कि एक महीने ये ट्रायल बेसिस पर चलाया जाएगा, बाद में शहर के लोगों के लिए उपलब्ध होगा, पर प्रश्न ये है कि आखिर एक महीने में वहाँ ऐसी क्या रिसर्च का कार्य होगा और बाद में ऐसा क्या अविष्कार हो चुका होगा, जिसका लाभ सिंदरी और आसपास के लोगों को मिलेगा,पर इन दिग्गजों के रहते सिंदरी में पिछले 2004 से स्वास्थ के मामले में सिन्द्रिवशियों के लिए खड़े़ रहने वाले एक मात्र डॉ. सी जी साहा अब सिन्द्रिवशियों के लिए बलियापुर के अंतर्गत हरहरी मौजा में 2023 के अप्रैल महीने तक 25 बेड का हॉस्पिटल तैयार कर लोगों की सेवा के लिए तैयार कर देंगे।
डॉ. साहा ने बताया कि विगत 2020 और 2021 में विश्व ब्यापि कोरोना का भयावह स्थिति सिंदरी जैसे छोटे शहर में भी देखने को मिला और उस वक्त केवल सिंदरी से धनबाद ले जाने के क्रम में सैकड़ों जाने गयी, जो आज भी हो रहा है, बस उस कुब्यवस्था को एक विराम देने के लिए मैं खुद अपनी एक टीम के साथ वहां 24X7 उपलब्ध रह कर लोगों की सेवा और सुरक्षा करना चाहता हूँ। डॉ. साहा ने बताया कि हॉस्पिटल में ऑर्थोपेडिक, नेफ्रो, गेस्टो, जेनरल फिजिशियन, गयनो आदि सेवा वहां उपलब्ध होगी। इसके अलावा एमरजेंसी और जेनरल सर्जरी भी की जाएगी। हॉस्पिटल में सिक्योरिटी गार्ड, कैंटीन, जेनरेटर आदि होगा। भविष्य में टॉप फ्लोर यानी तीसरी मंजिल पर आईसीयू, सीसीयू एवं बच्चों से संबंधित रोग विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे।
डॉ. साहा ने कहा कि 2021 में हर्ल में दो लोग जल गए थे, जिन्हें फर्स्ट एड भी देने लायक हर्ल ने अपने पास सुविधा नहीं रखा था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें धनबाद ले जाना पड़ा, उसी वक्त मैंने सोचा काश अभी मेरे पास वो सभी टूल्स उपलब्ध होती तो उन लोगों को धनबाद ले जाने तक जो कष्ट हुआ, वो श्याद नहीं होता। पिछले कई सालों की शिख ने मुझे खुद का हॉस्पिटल और भविष्य में एक ट्रोमा सेंटर भी उसी में उपलब्ध हो ये मेरा प्रयास होगा। डॉ. साहा ने संवाददाता के माध्यम से सिन्द्रिवशियों को आस्वस्त करना चाहा है कि जिस तरह से सिंदरी में उनके क्लीनिक में वो अपना विश्वास दिखाएं हैं वैसे ही बलियापुर में हॉस्पिटल खुलने पर अपना विश्वास दिखाते रहेंगे।





