तेहरान / वॉशिंगटन: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) एक बार फिर विनाशकारी महायुद्ध के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों ही अपनी-अपनी सैन्य ताकतों का नग्न प्रदर्शन कर रहे हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी नेवी खाड़ी के पानी में भीषण युद्धाभ्यास कर रही है, वहीं ईरान लगातार उन्नत मिसाइलों के परीक्षण से आसमान को दहला रहा है। सबसे डरावना संकेत यह है कि ईरान बेहद हड़बड़ी और जल्दबाजी में परमाणु हथियार (एटम बम) विकसित करने की कोशिश में जुटा है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इस गुप्त मिशन के कारण एक बहुत बड़े परमाणु हादसे का खतरा पैदा हो गया है, जो न केवल ईरान बल्कि पूरे विश्व को तबाही के आग में झोंक सकता है।

1. 'पिकेएक्स' की सीक्रेट सुरंगे और IRGC की खतरनाक साजिश

ईरान के विशालकाय पहाड़ों के सीक्रेट बंकरों—जिन्हें भेदने में अमेरिकी 'बंकर बस्टर' बम भी नाकाम साबित हुए हैं—के अंदर इस वक्त क्या पक रहा है, यह दुनिया के लिए एक गहरा रहस्य है। हालांकि, खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • परमाणु आपातकालीन दिशानिर्देश: तेहरान ने देश के आम नागरिकों को युद्ध के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। लोग राशन, दवाइयां और जरूरी सामान अपने घरों में जमा करने लगे हैं।
  • रेडिएशन हादसे का खतरा: ईरान का नया नेतृत्व और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) किसी भी कीमत पर जल्द से जल्द परमाणु शक्ति बनना चाहते हैं। बिना पर्याप्त विशेषज्ञों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन के कारण एटमी ब्लास्ट और जानलेवा रेडिएशन का खतरा मंडरा रहा है।
  • दोष मढ़ने का 'विक्टिम कार्ड': सूत्रों का दावा है कि यदि परमाणु बम बनाने के दौरान कोई भयानक हादसा होता है, तो ईरान इसका ठीकरा अमेरिका पर फोड़ेगा। तेहरान यह प्रचारित करने की योजना बना रहा है कि अमेरिका ने पिकेएक्स माउंटेन को तबाह करने के लिए टैक्टिकल या न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल किया है।

2. 'थ्री फिफ्टी एट' मिसाइल: अमेरिकी F-35 स्टेल्थ फाइटर का काल

अमेरिका जहां F-35 जैसे आधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट्स से हवाई हमला करने की रणनीति बना रहा है, वहीं ईरान ने इससे निपटने के लिए एक घातक मिसाइल मैदान में उतारी है—'358' (थ्री फिफ्टी एट)।

मिसाइल की मुख्य विशेषताएं और खतरे:

  • हवाई बारूदी सुरंग (Aerial Mine): यह मिसाइल फायर होने के बाद 640 किमी/घंटे की रफ्तार से हवा में 60 मिनट तक मंडरा सकती है। इसे रडार गाइडेंस की जरूरत नहीं होती, इसलिए यह अमेरिकी रडारों में पकड़ में नहीं आती।
  • पैसिव इन्फ्रारेड सेंसर: यह रडार सिग्नेचर के बजाय जेट के एग्जॉस्ट (इंजन) से निकलने वाली गर्मी (थर्मल सिग्नेचर) को ट्रैक करके टारगेट लॉक करती है।
  • घातक हमला: F-35 का पायलट इसे बेहद करीब आने पर ही देख पाता है। जेट से बचने के लिए फ्लेयर्स छोड़े जा सकते हैं, लेकिन इस मिसाइल के 10 किलो वजनी वॉरहेड से निकलने वाले बुलेट जैसे छर्रे पलक झपकते ही F-35 के परखच्चे उड़ा सकते हैं।

3. सेंटकॉम का युद्धाभ्यास: क्या सुरंगों में आमने-सामने होगी जंग?

अमेरिकी मध्य कमान (CENTCOM) के ताजा युद्धाभ्यास से साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस बार हमला पहले जैसा नहीं होगा:

  • हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और मरीन यूनिट: अमेरिकी कमांडोज का आमने-सामने की जंग का अभ्यास यह इशारा करता है कि अमेरिकी फौज ईरान की सीक्रेट सुरंगों में घुसकर यूरेनियम जब्त करने या द्वीपों पर सीधा कब्जा करने की योजना बना रही है।
  • मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट की तैनाती: पहली बार अमेरिका ने एयर-ग्राउंड टास्क फोर्स (मरीन कॉर्प्स) को खाड़ी में उतारा है जो लड़ाकू हेलिकॉप्टरों से बेहद तेज गति से जमीनी और द्वीपीय हमले करने में माहिर है।
  • ट्रंप का कड़ा रुख: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि "लंबे समय के फायदे के लिए थोड़ी तकलीफ उठानी पड़ेगी।" अमेरिका का मानना है कि मध्यस्थों (कतर, पाकिस्तान आदि) की कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं और ईरान को तबाह किए बिना होर्मुज जलडमरूमध्य का गतिरोध खत्म नहीं होगा।

4. होर्मुज जलडमरूमध्य बना 'जहाजों का कब्रिस्तान', 115 जहाज फंसे

युद्ध का सबसे बड़ा आर्थिक और कूटनीतिक बहाना होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना बन चुका है:

स्थिति / आंकड़ेविवरण
अक्टूबर महीने में हमलेहोर्मुज में इस महीने अब तक का सबसे भीषण हमला हुआ; 28 तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया।
कुल तबाह जहाजहमलों की वजह से अब तक 113 जहाज जलकर खाक हो चुके हैं।
खाड़ी में फंसा बेड़ाखौफ के माहौल के कारण 115 मालवाहक व तेल टैंकर फारस की खाड़ी में लंगर डाले खड़े हैं।

ईरान लगातार मशहद, कज़वीन और यज़्द से जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का टेस्ट कर रहा है ताकि अमेरिकी फाइटर जेट्स को गिराया जा सके।

निष्कर्ष: निर्णायक और विनाशकारी मोड़ पर दुनिया

अमेरिका ने खाड़ी देशों में पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और भारी सैन्य कार्गो विमान भेजने शुरू कर दिए हैं। मध्य-अवधि (Mid-Term) चुनावों के तुरंत बाद एक संक्षिप्त, लेकिन बेहद तेज और भयानक हमले की पटकथा लिखी जा चुकी है। ईरान का परमाणु उन्माद और अमेरिका की सैन्य जिद पूरी दुनिया को एक ऐसी विभीषिका की ओर ढकेल रही है, जहां से वापसी का कोई रास्ता नजर नहीं आता।

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