लखनऊ/रामपुर: समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए रामपुर स्थित 'मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' की जमीन और बहुमंजिला इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच (कुर्क) कर लिया है।
प्रवर्तन निदेशालय के लखनऊ जोनल ऑफिस द्वारा बुधवार को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियों का सरकारी बुक-वैल्यू 426.46 करोड़ रुपये दर्ज है, जबकि वर्तमान में इनकी बाजार कीमत (Market Value) लगभग 1170 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह पूरी कार्रवाई 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, आजम खान और उनके करीबियों के खिलाफ चल रही वित्तीय जांच के हिस्से के रूप में की गई है।
ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी पर आजम खान का पूर्ण नियंत्रण
रामपुर के गांव सिंघानखेड़ा, जौहर नगर में स्थित विशाल यूनिवर्सिटी कैंपस का स्वामित्व 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट' के पास है।
- स्थापना व नियंत्रण: इस ट्रस्ट की स्थापना खुद आजम खान ने की थी और वही इसके मुख्य ट्रस्टी हैं।
- पारिवारिक भूमिका: लखनऊ मुख्यालय वाले इस ट्रस्ट में उनके परिवार के सदस्य और नजदीकी सहयोगी भी शामिल हैं।
- पदभार: आजम खान इस यूनिवर्सिटी के मानद चांसलर भी हैं। यह ट्रस्ट यूनिवर्सिटी के अलावा एक पब्लिक स्कूल का संचालन भी करता है।
सरकारी फंड के गलत इस्तेमाल और धोखाधड़ी का आरोप
इससे पहले 13 अक्टूबर को जेल में बंद आजम खान और उनके शैक्षणिक ट्रस्ट के खिलाफ एक नई प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण और विकास के नाम पर करोड़ों रुपये के सरकारी धन का गलत इस्तेमाल किया गया और बड़े पैमाने पर वित्तीय 'अनियमितताएं' बरती गईं।
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा रामपुर में दर्ज कराई गई इस FIR में आजम खान के साथ-साथ मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, दो निजी संस्थाओं और कई अन्य लोगों को नामजद किया गया है। इन सभी पर:
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 (आपराधिक साजिश), धारा 316(5) (आपराधिक विश्वासघात) और धारा 318(4) (धोखाधड़ी)
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
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25 से अधिक FIR को जोड़कर ED ने कसा शिकंजा
आजम खान और उनके करीबियों पर पहले से ही 25 से अधिक अलग-अलग एफआईआर दर्ज थीं। प्रवर्तन निदेशालय ने जांच को मजबूती देने के लिए इन सभी मामलों को एक साथ जोड़कर PMLA के तहत व्यापक कार्रवाई की रणनीति बनाई।
इसी जांच प्रक्रिया के दौरान, ED के लखनऊ जोनल कार्यालय ने 10 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को ई-मेल भेजकर धारा 66(2) PMLA के तहत जुटाए गए ठोस सबूत साझा किए थे और नई FIR दर्ज करने की सिफारिश की थी। ईडी की इस ताजा कुर्की के बाद सपा नेता के सियासी और कानूनी संकट गहरा गए हैं।
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