वरीय संवाददाता,रांची।श्री कृष्ण लोक प्रशासन संस्थान रांची के सभागार में इन्स्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट (आईएचडी) रजत जयंती व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन रविवार को किया गया,जिसमें मैरीलैंड विश्वविद्यालय और एनसीएईआर के प्रोफेसर एवं निदेशक, समाजशास्त्री प्रोफेसर सोनाल्डे देसाई ने ग्लूम व ब्लूम इंडियन वूमेंस लेबर फोर्स पार्टीसिपेशन विषय पर अपना व्याख्यान दिया। इसमें रांची शहर से लगभग 125 व्याख्याता, शोधार्थी, एनजीओ के प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी एवं मीडियाकर्मी शामिल हुए। इसके अलावा व्याख्यान माला में 175 ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज हुई।





उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि भारत में श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी में हैरान करने वाले रुझान मिले हैं। महिलाओं का स्कूलों में नामांकन के बावजूद शिक्षा में निरंतर गिरावट छोटे बच्चों की देखभाल के बिना महिलाओं ‌द्वारा बिताए गए वर्षों की संख्या में वृद्धि के साथ प्रजनन दर में तेजी से गिरावट आई है। इन परिवर्तनों के परिणामस्वरूप महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में वृद्धि होनी चाहिए। इसके विपरीत एनएसएस और पीएलएफएस के सर्वेक्षण में पहले दो दशकों में महिलाओं के रोजगार में गिरावट दर्ज की गई, जिसमें 2020 में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने श्रम बाल में महिलाओं की सहभागिता की अद्यतन स्थिति की विस्तृत जानकारियां दी।





इस अवसर पर अर्थशास्त्री प्रोफेसर रमेश शरण ने अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवेश करते हुए अपनी टिप्पणी में कहा कि महिलाएं अपने काम के मामले में बराबरी से मापी नहीं जा रही है और वे सक्रिय श्रम बल का हिस्सा नहीं बन रही हैं।





इस अवसर पर अर्थशास्त्री व सामाजिक कार्यकर्ता प्रोफेसर जया द्रेज ने कहा कि लोगों का ध्यान मुख्य रूप से लाभकारी रोजगार पर होना चाहिए,जो जरूरी नहीं कि वेतनयुक्त रोजगार हो। उन्होंने इस तथ्य पर ध्यान केन्द्रित किया कि अर्थव्यवस्था दो तरह की होती है, एक बाजार अर्थव्यवस्था और दूसरी घरेलू अर्थव्यवस्था है, जिसमें शिक्षा, भोजन, स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता आदि का है। दूसरे प्रकार की अर्थव्यवस्था वास्तव में पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है और बिना कसी उचित संकेतक के बार-बार अनदेखी की गयी है। उन्होंने इस तथ्य पर ध्यान दिलाया कि यदि महिलाएं पशुधन की देखभाल करती हैं तो उन्हें नियोजित की श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन यदि वे बच्चों की देखभाल करती है तो वे नियोजित की श्रेणी में नहीं आती हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था खासकर महिलाओं के लिए किये गए कार्यों को परिभाषित करने और मापने की आवश्यकता है। अब समय आ गया है कि महिलाओं के लिए लाभकारी रोगजार की प्रवृति में तेजी लायी जाये,जिसमें गुणवत्तापूर्ण रोजगार होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया कि घरेलू कामकाज में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक में सुधार और उन्नयन की जरूरत है। महिलाओं के लिए स्वच्छता परिवहन और सुरक्षा जैसी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। अंत में शिक्षा और स्वास्थ्य में महिलाओं के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।





कार्यक्रम में आईएचडी नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर अलख नारायण शर्मा ने कहा कि भारत में आंकड़ों के अनुसार महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी बांग्लादेश से भी कम है। यह अभी भी अफगानिस्तान और पाकिस्तान के समान है। जबकि पश्चिमी देशों चीन आदि में इससे अधिक है। यह चिंता एवं मनन का विषय है।





इस दौरान उपस्थित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का भी उत्तर दिया गया।व्याख्यान माला के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन आईएचडी नई दिल्ली की सीईओ प्रियंका त्यागी ने किया।उक्त जानकारी आइएचडी के डॉ.अश्विनी कुमार ने दी।