आइची-नागोया (जापान):
भारत की स्टार पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स 2026 में अपनी अद्भुत निशानेबाजी से पूरे विश्व में देश का मान बढ़ा दिया है। जन्म से दोनों हाथ न होने के बावजूद अपने पैरों के सहारे तीर कमान थामने वाली 19 वर्षीय शीतल ने महिला कंपाउंड तीरंदाजी स्पर्धा में नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। उन्होंने फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है और अब पूरे देश की निगाहें उनके गोल्ड मेडल पर टिकी हैं।
कैसे बनाया शीतल ने विश्व रिकॉर्ड?
प्रतियोगिता के महिला कंपाउंड तीरंदाजी के प्री-क्वार्टरफाइनल मुकाबले में शीतल देवी ने हॉन्ग कॉन्ग की खिलाड़ी चान युएन को 149-134 के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी। इस शानदार मुकाबले में 149 अंक हासिल करते ही शीतल ने विश्व की दिग्गज तीरंदाजों को पीछे छोड़ दिया।
- तोड़ा पुराना रिकॉर्ड: इससे पहले महिला कंपाउंड का यह विश्व रिकॉर्ड ब्रिटेन की तीरंदाज जेसिका स्ट्रेटन के नाम था, जिन्होंने 2019 में 148 अंक बनाए थे।
- क्वालिफिकेशन में भी किया था कमाल: शीतल ने इस रिकॉर्ड से ठीक एक दिन पहले क्वालिफिकेशन राउंड में 720 में से 704 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की थी और नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया था। विश्व तीरंदाजी संस्था (World Archery) ने 19 अक्टूबर 2026 को इसकी आधिकारिक घोषणा की थी।
क्वार्टरफाइनल और सेमीफाइनल का सफर
रिकॉर्ड बनाने के बाद भी शीतल का शानदार फॉर्म जारी रहा:
- क्वार्टरफाइनल: उन्होंने फिलीपींस की खिलाड़ी अगस्टिना को 147-135 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
- सेमीफाइनल: इसके बाद सेमीफाइनल मुकाबले में जापान की आया शिनोहारा को 145-137 से मात देकर फाइनल का टिकट पूरी मजबूती के साथ पक्का कर लिया।
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प्रेरणादायक है शीतल देवी की संघर्ष यात्रा
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में जन्मीं शीतल देवी की जीवन यात्रा हर किसी को प्रेरित करती है। वह 'फोकोमेलिया' (Phocomelia) नामक एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति के साथ पैदा हुई थीं, जिसके कारण उनके दोनों हाथ विकसित नहीं हो पाए थे।
लेकिन शारीरिक चुनौतियों को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय शीतल ने इसे अपनी ताकत बनाया। उन्होंने अपने पैरों और शरीर के अन्य अंगों की मदद से तीर चलाने की अनूठी और कठिन तकनीक सीखी। आज उनकी यही लगन उन्हें अंतरराष्ट्रीय फलक पर ले आई है:
- 2022 एशियन पैरा गेम्स (हांगझोऊ): दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल।
- 2024 पेरिस पैरालंपिक: मिक्स्ड टीम स्पर्धा में शानदार ब्रॉन्ज मेडल।
- वर्ष 2025: पैरा आर्चरी विश्व चैंपियन का खिताब।
भारत के लिए क्यों खास है यह सफलता?
एशियन पैरा गेम्स 2026 में शीतल देवी का यह ऐतिहासिक प्रदर्शन भारतीय पैरा खेलों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। भारत के पिछले शानदार प्रदर्शन (111 कुल पदक, जिनमें 29 गोल्ड शामिल थे) के बाद, इस बार शीतल से स्वर्ण पदक की उम्मीदें बेहद प्रबल हो चुकी हैं। उनकी यह कहानी सिर्फ एक खेल में जीत की नहीं, बल्कि अजेय हौसले और बुलंद इरादों की मिसाल है।
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