जमशेदपुर।झारखंड राज्य में कुल 608 बालू घाट हैं।जिसमें से सिर्फ 17 बालू घाटों का ही टेंडर हुआ है और बचे हुए घाटों से अवैध रूप से बालू का उठाव कर बाजारो समेत ईंट,गिट्टी व बालू के सप्लायर को बेचा जा रहा है।राज्य में बीते 4 सालों से बालू घाटों की बंदोबस्ती नहीं हो सकी है।जिसके कारण राज्य में प्रति माह 80 से 100 करोड़ रुपए बालू का अवैध कारोबार किया जा रहा है।





इसी क्रम में शहर के कदमा थाना अंतर्गत मरीन ड्राइव में भी खुलेआम दिन के उजाले में बालू का अवैध कारोबार किया जा रहा है। जिसमें रामजनम नगर और बागे बस्ती वासी शामिल है। यहां सूरज उगने के साथ ही बालू का अवैध कारोबार शुरू हो जाता है और जो सूरज ढलने तक चलता रहता है। महिला और पुरुषों के साथ साथ बच्चे भी बोरों समेत अन्य चीजों में खरकाई नदी से बालू का उठाव कर मरीन ड्राइव मुख्य सड़क के किनारे रखते हैं। जिसके बाद बस्ती वासी स्थानीय सप्लायर को प्रति डाला टेंपो 500 से 800 रुपए में बालू बेचकर अच्छी खासी कमाई कर लेते हैं। वहीं बालू चोरी बस्ती वासियों के लिए रोजगार बन गया है। साथ ही सप्लायर बस्ती वासियों से बालू खरीद कर उसमें अपना मुनाफा जोड़कर 1000 से 1200 रुपए प्रति टेंपो ग्राहक को बेच देते हैं। जिससे उन्हें मोटी आमदनी होती है।





रोजाना सैकड़ों डाला टेंपो में हजारों सीएफटी बालू अवैध रूप से बेची जा रही है। बावजूद इसके खनन विभाग के साथ साथ स्थानीय थाना ने चुप्पी साध रखी है। जबकि मरीन ड्राइव के रास्ते सरकारी अधिकारियों और पुलिस गश्ती दल का रोजाना आना जाना लगा रहता है। फिर भी खुलेआम नदी से बालू की चोरी हो रही है। जबकि बालू की अवैध चोरी रोकने के लिए टास्क फोर्स का भी गठन किया गया है। मगर चोरी रुकने का नाम नहीं ले रही है। अब आगे देखना यह है कि कब तक बालू चोरी पर जिला प्रशासन लगाम लगाती है।