नई दिल्ली: जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल (GST Appellate Tribunal) ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) रिफंड को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि यदि कैंसल किए गए एयरलाइन टिकटों के मामले में कुछ खास शर्तें पूरी होती हैं, तो चुकाए गए जीएसटी का रिफंड वापस मिल सकता है। यह फैसला एविएशन सेक्टर और यात्रियों—दोनों के लिए एक बड़ी कानूनी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड बनाम कोच्चि सीजीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त (Commissioner of Cochin CGST and Central Excise) से जुड़ा हुआ है।

  • समय अवधि: यह मामला अक्टूबर 2019 से मार्च 2021 के बीच का है।
  • कोविड-19 का प्रभाव: इस दौरान कोरोना महामारी (Covid-19 Pandemic) के चलते दुनियाभर में लॉकडाउन लगा था और कई उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं।
  • रिफंड की मांग: सिंगापुर एयरलाइंस ने कुल 45,92,528 रुपये के आठ जीएसटी रिफंड दावों के लिए आवेदन किया था, क्योंकि एयरलाइन ने यात्रियों को उनके टिकट का किराया और उस पर लगा जीएसटी दोनों वापस कर दिया था।
  • शुरुआती अड़चन: शुरुआती दौर में जीएसटी संयुक्त आयुक्त (Joint Commissioner of GST) ने इन रिफंड दावों को खारिज कर दिया था, जिसके बाद एयरलाइन ने न्याय न्यायाधिकरण (Tribunal) का दरवाजा खटखटाया था।

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ट्रिब्यूनल की कोच्चि पीठ का फैसला

जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण की कोच्चि (एर्नाकुलम) पीठ ने 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुनाते हुए संयुक्त आयुक्त (अपील) के पुराने आदेश को खारिज कर दिया।

ट्रिब्यूनल ने अपने निर्णय में कहा कि:

  1. एयरलाइन के पास इस बात के पर्याप्त सबूत और दस्तावेज मौजूद हैं कि रद्द किए गए टिकटों का रिफंड सीधे संबंधित यात्रियों तक पहुंच चुका है।
  2. इससे यह भी साबित होता है कि कर (Tax) के बोझ को आगे उपभोक्ताओं पर हस्तांतरित नहीं किया गया है।
  3. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, यदि महामारी या अन्य कारणों से उड़ानें रद्द होने पर एयरलाइन ने यात्रियों को पूरी राशि (जीएसटी सहित) वापस कर दी है, तो एयरलाइन रिफंड पाने की पात्र है।

दो हफ्ते में भुगतान का निर्देश

ट्रिब्यूनल ने राजस्व विभाग (Revenue Department) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह फैसले के दो सप्ताह के भीतर एयरलाइन के रिफंड दावे को सेटल करे और ब्याज सहित पूरा भुगतान करे।

विशेषज्ञों (जैसे नंगिया ग्लोबल के अप्रत्यक्ष कर पार्टनर राहुल शेखर) का मानना है कि यह फैसला उद्योग के लिए बेहद सकारात्मक है। इसका सीधा मतलब यह है कि जहां कोई कमर्शियल ट्रांजैक्शन रद्द हो जाता है और वसूला गया टैक्स ग्राहकों को पूरी तरह लौटा दिया जाता है, वहां जीएसटी लागू नहीं होना चाहिए।

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