नई दिल्ली: देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, घरेलू तेल एवं गैस भंडार को बढ़ाने तथा महंगे आयात पर भारत की निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी पहल की है। सरकार ने ₹84,084 करोड़ की महत्वाकांक्षी 'समुद्र मंथन' (Samudra Manthan) योजना के परिचालन दिशानिर्देश (Operational Guidelines) जारी कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2025 को घोषित इस योजना का मुख्य उद्देश्य गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन खोज की लागत और शुरुआती वित्तीय जोखिम को कम करना है।
समुद्र मंथन योजना की प्रमुख विशेषताएं (Quick Highlights)
| विवरण | प्रमुख बिंदु |
| कुल बजट | ₹84,084 करोड़ |
| लक्ष्य | देश के भंडार में 60 करोड़ टन से अधिक तेल समतुल्य संसाधन (Oil Equivalent) जोड़ना |
| अवधि | वित्त वर्ष 2030-31 तक (FY 2026-27: तैयारी वर्ष, FY 2027-28 से 2030-31: प्रथम चरण) |
| पात्रता | केवल सरकारी कंपनियां (PSUs) या उनके नेतृत्व वाले गठजोड़ (Consortia) |
| दायरा | 2016 के बाद राजस्व हिस्सेदारी अनुबंध व्यवस्था (Revenue Sharing Regime) में आवंटित ब्लॉक |
1. वित्तीय सहायता और किस्तों का गणित
योजना के तहत 400 मीटर से अधिक (गहरे) और 1,500 मीटर से अधिक (अति-गहरे) समुद्री क्षेत्रों में कुल 60 कुओं की खुदाई को वित्तीय मदद दी जाएगी:
- खोजी कुएं (Exploratory Wells - 56 कुएं): इनकी वास्तविक लागत का 50% तक अनुदान मिलेगा। प्रति कुएं की अधिकतम सीमा ₹675 करोड़ तय की गई है।
- स्ट्रैटिग्राफिक कुएं (Stratigraphic Wells - 4 कुएं): भूगर्भीय संरचना और चट्टानों की परतों के अध्ययन के लिए खोदे जाने वाले इन कुओं के लिए 100% वित्तीय सहायता मिलेगी (अधिकतम ₹1,350 करोड़ प्रति कुआं)।
- भुगतान की शर्तें: सहायता राशि प्रगति के आधार पर दो चरणों में जारी होगी—स्वीकृत गहराई का 40% काम पूरा होने पर 40% राशि और कार्य पूर्ण होकर रिपोर्ट मंजूर होने पर शेष 60% राशि।
रिफंड और जोखिम कवरेज: यदि खोज में तेल या गैस नहीं मिलता, तो सरकार पूरा नुकसान स्वयं वहन करेगी। लेकिन खोज सफल रहने पर कंपनियों को वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के 7 साल बाद (या खोज/विकास लागत का 50% वसूल होने पर) बिना किसी ब्याज/महंगाई वृद्धि के वार्षिक किस्तों में यह राशि सरकार को लौटानी होगी।
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2. योजना के तीन प्रमुख चरण/भाग (Three Components)
- भाग-1 (खोज सहायता): नए संसाधनों की खोज के लिए खोजी कुओं की खुदाई में प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता।
- भाग-2 (साझा अवसंरचना व VGF): छोटे या व्यावसायिक रूप से अलग-थलग तेल-गैस भंडारों को जोड़ने के लिए 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (VGF)। इसके तहत सब-सी मैनिफॉल्ड, पाइपलाइन और साझा फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म जैसी सुविधाओं के निर्माण में मदद मिलेगी।
- प्राथमिकता: शुरुआत में महानदी बेसिन को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि कच्छ बेसिन के लिए भी सांकेतिक प्रावधान है।
- भाग-3 (इकोसिस्टम विकास): तेल-गैस उद्योग के लिए जेटी (Jetty), गोदाम, परीक्षण प्रयोगशालाओं और विनिर्माण/सेवा क्षेत्रों का विकास।
3. कड़े नियम और शर्तें
- नए कुओं पर ही लागू: यह सहायता केवल नए संसाधनों की खोज के लिए खोदे जाने वाले कुओं पर मिलेगी। पहले से खोजे जा चुके भंडारों से उत्पादन शुरू करने के लिए बनने वाले विकास (Development) या साइडट्रैक कुओं पर अनुदान लागू नहीं होगा।
- पारदर्शिता और दंड: लागत बढ़ने या देरी होने पर सहायता राशि अपने आप नहीं बढ़ेगी। लक्ष्यों में चूक या धन के दुरुपयोग की स्थिति में फंड रोका जा सकता है और जारी की गई राशि की रिकवरी भी की जा सकती है।
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