नई दिल्ली:
भारतीय वायुसेना (IAF) के प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत (एपी) सिंह ने थिएटराइजेशन और तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) के एकीकरण को लेकर देश का दृष्टिकोण स्पष्ट किया है। उन्होंने साफ कहा कि थिएटराइजेशन का उद्देश्य लड़ाकू विमानों (Fighter Jets) को केवल अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में स्थायी रूप से बांटना नहीं है, बल्कि एकीकृत सैन्य ढांचे के भीतर वायु शक्ति (Air Power) का अधिकतम प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
एक विशेष साक्षात्कार में वायुसेना प्रमुख ने भविष्य के युद्धों, तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन और हालिया सैन्य अभियानों पर अपनी बात रखी।
'ऑपरेशन सिंदूर': पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने पश्चिमी मोर्चे पर 1200 किलोमीटर की चौड़ाई और 200 किलोमीटर की गहराई तक अत्यधिक सटीक (Precision) हमले किए।
- अभेद्य मारक क्षमता: इस अभियान ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय वायुसेना की पहुंच से बाहर कोई भी लक्ष्य नहीं है। रक्षा विशेषज्ञों द्वारा इस बयान को सीधे तौर पर पाकिस्तान के लिए एक कड़ी चेतावनी माना जा रहा है।
- रणनीतिक प्रतिरोध: उन्होंने जोर देकर कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने वायुसेना की क्षमता-आधारित रणनीति को सही साबित किया है। इससे स्पष्ट होता है कि देश की सुरक्षा के लिए वायु शक्ति सबसे अहम जवाबी क्षमता और रणनीतिक प्रतिरोध (Strategic Deterrence) का प्रमुख साधन है।
- भविष्य की तैयारी: हालांकि, उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि इस सफलता के आधार पर तैयारियों में ठहराव नहीं आना चाहिए, बल्कि इस क्षमता को और अधिक व्यापक व मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम करना होगा।
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थिएटराइजेशन और तीनों सेनाओं के एकीकरण पर बड़ा बयान
थिएटराइजेशन (Theatrization) के सवाल पर वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय वायुसेना तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त संचालन (Jointness) और एकीकरण की प्रक्रिया के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
"भविष्य के युद्ध अपने स्वरूप में ही कई क्षेत्रों (Multi-domain) में एक साथ लड़े जाएंगे। ऐसे में थल सेना, नौसेना और वायुसेना को पहले के मुकाबले कहीं अधिक करीबी और बेहतर तालमेल के साथ काम करना होगा।" — एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, वायुसेना प्रमुख
उन्होंने थिएटराइजेशन के लिए मूल सिद्धांत साझा करते हुए कहा:
- केंद्रीय नियंत्रण और विकेंद्रीकृत निष्पादन: जहां जरूरी हो, वहां नियंत्रण केंद्रीय स्तर (Centralised Control) पर रखा जाए और जहां उपयुक्त हो, वहां कार्रवाई करने की जिम्मेदारी विकेंद्रीकृत (Decentralised Execution) होनी चाहिए।
- विदेशी मॉडल की नकल न करें: भारत के सैन्य ढांचे का मूल्यांकन देश की अपनी भौगोलिक व सुरक्षा जरूरतों के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी अन्य देश के मॉडल की अंधी नकल करके।
- लचीलापन जरूरी: आने वाले युद्धक्षेत्र का स्वरूप पूरी निश्चितता के साथ पहले से तय नहीं किया जा सकता, इसलिए सैन्य ढांचे में लचीलापन होना अनिवार्य है।
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