कौलेश्वरी पर मुंडन संस्कार को लेकर उमड़ा जनसैलाब,मंदिर में कुव्यवस्था को लेकर लोगों ने जताई नाराजगी





पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से करोड़ों की योजना है लंबित, पानी के लिए खाक छान रहे हैं श्रद्धालु





प्रतिनिधि,हंटरगंज(चतरा)। प्रखंड के सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त तीन धर्मों अर्थात जैन बौद्ध एवं सनातन धर्म के संगम स्थल सिद्ध पीठ मां कौलेश्वरी पहाड़ पर गुरुवार को मुंडन संस्कार को लेकर जनसैलाब उमड़ा।घोर अव्यवस्था के आलम के बीच मां कौलेश्वरी पहाड़ पर श्रद्धालुओं की भीड़ से पूरा पहाड़ पटा रहा। सरोवर के खिलते श्वेत रंग के कमल का फूल मानो शोभा में चार चांद छू रहे हो। एक ओर अव्यवस्था फिर भी आस्था के प्रतीक के रूप में श्रद्धालुओं की अपार भीड़।





कौलेश्वरी पहाड़ पर पुजारियों का आतंक भी छाया रहा। वहीं समिति के सदस्यों की अनदेखी से लोग काफी आहत दिखे। श्रद्धालुओं से बजबरन पुजारियों के द्वारा अवैध उगाही होती रही। विकास के नाम पर किसी भी योजना को कौलेश्वरी पहाड़ पर उतारने में बरसो लग जाना प्रशासनिक पदाधिकारियों की उपेक्षा ही कहा जा सकता है ।पेयजल को लेकर एक योजना बरसों से लंबित पड़ी है।





पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता आविक अंबाला ने पूछे जाने पर बताया कि बिजली विभाग के द्वारा बिजली उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण योजना लंबित है।यह आश्चर्य की बात है कि जहां हजारों की संख्या नहीं बल्कि लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हो और यह क्षेत्र बिजली से आज भी अछूता हो यह शर्मनाक बात ही कहा जाएगा। आज भी कौलेश्वरी पहाड़ बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। कौलेश्वरी विकास प्रबंधन समिति की बैठक इधर लगातार कई वर्षों से नगण्य है।जिला प्रशासन को चाहिए कि कौलेश्वरी विकास प्रबंधन समिति की बैठक कर समस्या पर गंभीरता से विचार करें,जिस तरह कौलेश्वरी मंदिर में पूजा दर्शन को लेकर आपाधापी देखा गया। वह बहुत ही शर्मनाक बात है। कोई व्यवस्था नहीं ,पुजारियों के द्वारा सिर्फ पैसे की उगाही श्रद्धालुओं को प्रताड़ित करना , बजबरन दक्षिणा के नाम पर शोषण करते देखा गया ।कई लोगों ने अव्यवस्था पर पुजारी एवं समिति के लोगों पर कड़ा प्रहार भी किया। कौलेश्वरी पहाड़ पर प्लास्टिक का बोतल थर्माकोल से तलाव लबालब भरा हुआ है। शौचालय स्नानागार बिजली की व्यवस्था से आज भी कौलेश्वरी पहाड़ अछूता है। मंदिर जीर्णोद्धार के नाम पर रखा गया ईट्ट का एक टुकड़ा भी स्थल मौजूद नहीं है।