गव्य विकास:गो-पालन से दुग्ध उत्पादन व पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने की पहल
आर्थिक सशक्तिकरण में काफी सहायक है गो-पालन : कौशलेंद्र कुमार सिंह
विशेष संवाददाता
रांची। गव्य विकास निदेशालय की ओर से पशुपालकों के लिए संचालित योजनाओं से लाभान्वित होकर किसानों की दशा और दिशा बदल रही है।गो-पालन से न सिर्फ दूध के उत्पादन में वृद्धि हो रही है, बल्कि इससे आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है। उक्त बातें गव्य विकास निदेशालय झारखंड के अधीनस्थ प्रशिक्षण एवं प्रसार संस्थान के मुख्य अनुदेशक व रांची जिला गव्य विकास पदाधिकारी कौशलेंद्र कुमार सिंह ने बुधवार को पूर्वांचल सूर्य से विशेष बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि प्रगतिशील किसानों के लिए व्यावसायिक डेयरी फार्मिंग के तहत विशेष रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इससे काफी संख्या में पशुपालक लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि रांची जिला अंतर्गत लगभग दो दर्जन प्रगतिशील किसान विभागीय प्रशिक्षण प्राप्त कर आर्थिक रूप से समृद्ध होने में सफल हुए हैं। ऐसे प्रगतिशील कृषकों से प्रेरित होकर छोटे-मोटे स्तर पर डेयरी फार्म संचालित करने वाले पशुपालक भी गो-पालन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गाय पालने से न सिर्फ दूध के उत्पादन द्वारा ही लोगों को आमदनी होती है, बल्कि गाय के गोबर से विभिन्न सामग्री तैयार कर भी आमदनी की जा सकती है। इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं भी सृजित हो रही है। उन्होंने बताया कि विगत दिनों राज्य के प्रगतिशील किसानों के लिए गव्य विकास विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में झारखंड के 16 जिलों से लगभग डेढ़ सौ पशुपालकों ने भाग लिया। उन्हें व्यावसायिक डेयरी फार्मिंग की तकनीक से अवगत कराते हुए आर्थिक समृद्धि के लिए विभिन्न प्रकार के उपयोगी सामग्री निर्माण करने संबंधी प्रशिक्षण दिया गया।
श्री सिंह ने बताया कि प्रशिक्षणार्थियों के विशेष आग्रह पर विभाग की ओर से एक दिवसीय अतिरिक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। ताकि विभागीय योजनाओं के तहत गो-पालन से बहुआयामी लाभ प्राप्त करने की तकनीक से पशुपालक भलिभांति अवगत हो सकें। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में महाराष्ट्र के नागपुर स्थित देवलापार में गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र में यहां के 50 पशुपालकों को चयनित कर विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। वहां पशुपालक गाय के गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार करने, कीट नियंत्रक बनाने सहित अन्य जानकारियां प्राप्त करेंगे।
श्री सिंह ने बताया कि डेयरी व्यवसाय से आमदनी में बहुआयामी लाभ संभव है। उन्होंने बताया कि गाय से दूध प्राप्त कर दूध की बिक्री से आमदनी तो होती ही है, साथ-साथ दूध से दुग्ध जनित पदार्थ दही, लस्सी, पेड़ा आदि निर्माण से भी आमदनी की जा सकती है।इसके अतिरिक्त बछिया पालन कर गाय तैयार कर बिक्री करने से भी पशुपालकों को आमदनी होती है। वहीं गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर जैविक खाद की बिक्री कर भी आमदनी प्राप्त की जा सकती है। गोबर से बिजली और गैस उत्पादन कर आमदनी की जा सकती है। गोबर सैलरी का उपयोग खेतों में कर कृषि को बढ़ावा देने एवं अधिक उपज प्राप्त करने में काफी सहायक है। साथ ही गोमूत्र से कीट नियंत्रक तैयार कर सब्जी, फल व अन्य फसलों में छिड़काव विभिन्न प्रकार के कीटाणुओं से फसलों को बचाने में सहायक होता है।
उन्होंने बताया कि रांची जिला गव्य विकास पदाधिकारी के पद पर लगभग डेढ़ वर्षो से कार्यरत हैं। वहीं, प्रशिक्षण एवं प्रसार संस्थान के मुख्य अनुदेशक के रूप में भी अतिरिक्त प्रभार में वह अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस दौरान उन्होंने रांची जिले में गव्य विकास के क्षेत्र में विभिन्न उल्लेखनीय कार्य किए हैं, जिससे पशुपालक लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि पशुपालकों के लिए अंतर्जिला भ्रमण कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसके तहत एक जिले के पशुपालक दूसरे जिले के पशुपालकों से अपने अनुभवों को साझा करेंगे, साथ ही साथ गो-पालन में आने वाली परेशानियों से भी अवगत होंगे। अंतर जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत पुरुषों के अलावा महिला पशुपालकों को भी शामिल किया जाएगा। इससे गो-पालन के प्रति लोगों में उत्साह बढ़ेगा। पशुपालकों की जिज्ञासाएं भी दूर होंगी। इससे आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।





