रांची।झारखंड में कुर्मी एसटी में शामिल करने की मांग को लेकर गांव-गांव गोलबंद हो रहे हैं।हर गांव से चुने हुए प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र से दिल्ली कूच करने की तैयारी कर रहे हैं। पिछले दिनों टोटेमिक कुर्मी और कुर्मी विकास मोर्चा ने फैसला लिया है कि 12 दिसंबर को अपनी मांगों को लेकर राज्य के कुर्मी संसद का घेराव करेंगे। इसमें बड़ी संख्या में कुर्मी समाज के लोग शामिल होंगे।
कुर्मी विकास मोर्चा के नेता शीतल ओहदार ने बताया कि दो महीने पहले कोल्हान से सटे बंगाल, ओडिशा के कुर्मी भी इस आंदोलन में शामिल हुए थे।कई स्थानों पर रेल रोको कार्यक्रम चला और बेहद सफल रहा।इस बार छोटानागपुर के कुर्मी सबसे अधिक संख्या में संसद कूच करने की तैयारी में लग गए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मांग पर राज्य व केंद्र सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। झारखंड के कुर्मी समाज को आदिवासी का दर्जा नहीं मिला।
दलीय नेता मौन कुर्मी आंदोलन का नेतृत्व किसी राजनीतिक दल के हाथों में नहीं है।इस आंदोलन की कमान फिलहाल सामाजिक संगठनों के हाथों में है। हर इलाके में अलग-अलग सामाजिक संगठन इसकी अगुवाई कर रहे हैं। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दल कुर्मी समुदाय के इस आंदोलन को समर्थन नहीं कर रहे हैं। कुछ दलों के कुर्मी नेता इस आंदोलन को लेकर मौन हैं, तो कुछ नेता अंदर ही अंदर इसका समर्थन कर रहे हैं।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक व मंत्री जगरनाथ महतो ने इसका जोरदार समर्थन किया है,लेकिन पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे राजनीतिक आंदोलन करार दिया है। कांग्रेस और भाजपा के नेता इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बयान देने में गुरेज कर रहे हैं। जब तक पार्टी का आला नेतृत्व रुख स्पष्ट नहीं करेगा, तब तक राज्य के नेता टिप्पणी नहीं करेंगे।
झारखंड के कुर्मियों की इस मांग की आदिवासी समुदाय खुलकर विरोध कर रहा है। इसे लेकर इनकी कई बैठकें हो चुकी हैं। पूर्व सांसद सालखन मुर्मू इसकी मुखालफत करने वाले नेता हैं। गीताश्री उराव और आदिवासी सरना संगठन भी इस आंदोलन का विरोध कर रहे हैं।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने इस मुद्दे से किनारा करने के लिए एक चतुरायी पूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश कमेटी ने एक अध्ययन दल बनाया है, जिसमें कांग्रेस के कुर्मी और आदिवासी समुदाय के वरिष्ठ नेताओं को अध्ययन दल में शामिल किया गया है। यह अध्ययन दल पूरे मामले का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट कांग्रेस नेतृत्व को सौंपेगा। रिपोर्ट के अनुसार ही इस पर प्रदेश कांग्रेस अपना मंतव्य देगी। भाजपा फिलहाल इस मामले में पूरी तरह मौन है। 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के कार्यकाल के समय झारखंड से इस संबंध में एक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी गई थी,लेकिन यह रिपोर्ट अभी जस की तस है।





