पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि,चतरा।चतरा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव का शंखनाद हो चुका है।विगत सरकार से असंतुष्ट लोगों का एक धड़ा सरकार की नाकामियों और उपेक्षाओं से अच्छा खासा नाराज दिख रहा है।झारखंड विधान सभा चुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन के विरोध में कई मुस्लिम संगठन,मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक सरोकार रखने वालों ने हेमंत सरकार के प्रति बड़ी नाराजगी जताई है।





मुस्लिम तंजीम के अधिकारियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि झारखंड के तमाम मुस्लिम तंजिमों संगठनों और उलमाओं के संगठन के बदौलत ही झारखंड में महागठबंधन की सरकार 2019 बनना संभव हुआ था।सरकार गठन को लेकर मुस्लिम तंजिमों की महती भूमिका रही है।सरकार गठन के बाद सरकार ने मुस्लिम अल्पसंख्यकों को राजनीतिक आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाई और न ही इस के लिए कोई पहल की।जिससे मुसलमानों में काफी नाराजगी है।मुस्लिम अल्प संख्यकों के उत्थान और विकास के लिए जो कार्य किए जाने चाहिए थे नहीं हुआ।मुसलमानों से जुड़े सभी समस्याओं को सरकार बंद बस्ते में डालने का काम की है।बड़ी अफसोस की बात है कि मुसलमानों और उर्दू से जुड़े समस्याओं पर जो सरकार को ध्यान आकृष्ट कराने वाले गांडे विधायक डॉक्टर सरफराज अहमद थे।उन्हें एक सुनियोजित ढंग से इस्तीफा दिलवाकर हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को विधायक बनवाने का काम किया।जब जनरल सीट और सुरक्षित सीट पर आप ही चुनाव लड़ेंगे तो यहां के अल्पसंख्यकों का किया होगा। सुरक्षित सीट पर कोई जनरल चुनाव लड़ नहीं सकता और जीते हुए विधायक को इस्तीफा दिलाकर सीट पर कब्जा करना राजनीतिक रूप से हाशिए पर भेजने का कवायद ही कहा जा सकता है।





मुस्लिम तंजीम के अधिकारियों ने कहा कि राजद ने झारखंड के छह विधान सभा सीटों में से किसी एक सीट पर भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं दिया जाना मुस्लिम लीडर शिप को खत्म करने के बराबर ही कहा जा सकता है।मुस्लिम अल्पसंख्यक आखिर कब तक किसी पार्टी का वोट बैंक बनता रहेगा,वोट के जरिए पद और पावर किसी और को देता रहेगा।राजद सिर्फ मुसलमानों को भी वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करना जानती है।कांग्रेस जेएमएम और राजद ने लोकसभा में किसी एक मुस्लिम को भी टिकट नहीं दी यह भी जग जाहिर है।





मुस्लिम जंजीम के अधिकारियों ने कहा कि जबकि सुरक्षित सीट से कल्पना सोरेन को चुनाव लड़ाया जा सकता था।यह मुसलमानों की राजनीतिक हाशिए पर भेजने का काम किया गया है। इतना ही नहीं आखिरी समय में अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया गया,जो पूरी तरह से काम भी नहीं कर पाई।सरकार ने उर्दू भाषा के विकास के लिए उर्दू एकेडमी का गठन नहीं की,मदरसा बोर्ड का गठन 24 वर्षों से लंबित है,प्राइमरी स्कूलों से लेकर मिडिल स्कूल,हाईस्कूल प्लस टू स्कूलों,कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में उर्दू शिक्षकों की बहाली नहीं किया जाना उर्दू भाषी छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ सरकार खिलवाड़ की है।वहीं सरकार की परियोजना बालिका उच्च विद्यालय में स्थापना काल से उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई।कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका उच्च विद्यालय में उर्दू के शिक्षक आज तक बहाल नहीं हुए। विगत चौबीस वर्षों से झारखंड की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले अल्पसंख्यक मुस्लिम अपनी राजनीतिक आर्थिक और शैक्षणिक विकास के इंतजार में आस लगाए बैठे हैं।





मुस्लिम जंजीम के अधिकारियों ने कहा कि हेमंत सरकार से उम्मीद थी,लेकिन मुसलानों के विकास और उत्थान के लिए कोई कार्य नहीं किए गए। लगभग राज्य के कुछ को छोड़कर सभी सीट पर मुस्लिम अल्पसंख्यकों के वोट के लिए विकल्प इस बार बड़े पैमाने पर मौजूद हैं। जय राम महतो की पार्टी जेएलकेएम,सुदेश महतो की आजसू,ब्रेस्टर असद उद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम,चिराग पासवान की पार्टी लोजपा,कहीं सपा तो कही बसपा तो कही राष्ट्रीय जन क्रांति मोर्चा, सीपीआई,सीपीआईएम और जदयू ने अपना अपना उम्मीदवार चुनाव में उतरा है।





अब भाजपा से भी किसी को परहेज नहीं रहा है।मुस्लिम समुदाय के न्याय,अधिकार,रोजगार विकास,उर्दू, मदरसा से जुड़े मामले को हल करने के बजाए विवादास्पद बनाने का प्रयास लगातार किया जाता रहा है।ऐसे सभी मामलो को लेकर विधानसभा स्तर मुस्लिम समाजिक संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता जल्द ही बैठक कर कोई ठोस निर्णय लेने का मंसूबा बना रहे हैं।अगर ठोस कदम उठाया गया तो इंडिया गठबंधन को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।