वाराणसी।काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शुक्रवार को चला सर्वे और वीडियोग्राफी का काम आज शनिवार दोपहर तीन बजे फिर से शुरू होगा।शुक्रवार को सर्वे और वीडियोग्राफी सिर्फ़ मां श्रृंगार गौरी तक ही हो पाई,क्योंकि सर्वे करने के बाद लौटे अधिवक्ताओं ने बताया कि मस्जिद परिसर में लगी बैरिकेडिंग के अंदर जाने से दूसरे पक्ष की ओर रोका गया।मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने साफ़ तौर पर कहा कि अधिवक्ता और कोर्ट कमिश्नर पक्षपात कर रहे हैं।कोर्ट ने मस्जिद की वीडियोग्राफी कराने का कोई आदेश नहीं दिया है।इसलिए ये हम नहीं होने देंगे।







कोर्ट कमिश्नर आज दोपहर 3 बजे दोबारा सर्वे के लिए बैरिकेडिंग के अंदर जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश के मद्देनजर जिला मजिस्ट्रेट को स्थिति से अवगत कराते हुए उन्हें पूरी जानकारी दे दी है।मुस्लिम पक्ष के वकील अभय यादव ने ऐसा आरोप लगाया कि अधिवक्ता और कोर्ट कमिश्नर का व्यवहार निष्पक्ष नहीं रहा। जिसके लिए हमने एक प्रार्थना पत्र दिया,जिसमें लिखा है कि कोर्ट कमिश्नर का व्यवहार उचित नहीं है।वह एक पार्टी के रूप में यहां आए थे। उनपर हम कतई भरोसा नहीं कर सकते हैं। 7 मई को इसी आधार पर न्यायालय में वकील महोदय को परिवर्तित करने के लिए प्रार्थना पत्र देंगे।हम इस आदेश से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है।यहां वादी अधिवक्ता खुद खड़े होकर न्यायालय के आदेश की अवमानना कर रहे हैं।





वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने बताया कि 3 घंटे कोर्ट कमिश्नर द्वारा ज्ञानवापी परिसर में सर्वे और वीडियोग्राफ़ी का कार्य किया गया।इसमें श्रृंगार गौरी का सर्वे और वीडियोग्राफी पूरी करवा ली गयी है।कोर्ट के आदेश के बावजूद प्रतिवादी पक्ष ने हमें बैरीकेडिंग के अंदर नहीं जाने दिया और हमें मना कर दिया।ऐसे में हम वापस लौट आये। कोर्ट कमिश्नर ने इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेट से बात की है।





अजय कुमार मिश्रा हैं वकील कमिश्नर





गुरुवार को यह तय हो गया था कि श्रृंगार गौरी और दूसरे विग्रहों, देवी-देवताओं के स्थान का सर्वे होगा।अजय कुमार मिश्रा जोकि वकील कमिश्नर अदालत की तरफ से नियुक्त किए गए हैं।उन्होंने अपनी और साथ-साथ सर्वे किए गए सभी सामानों की सुरक्षा की गुहार लगाई थी जिस पर अदालत ने सुरक्षा की जिम्मेदारी वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट को दी है।





ज्ञानवापी मस्जिद की संस्था अंजुमन इंतजामिया मस्जिद के वकील ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि इस सर्वे में जिस श्रृंगार गौरी मंदिर की बात की जा रही है पहले पूछा जाएगा कि वो मंदिर है कहां, मस्जिद के परिसर में ऐसा कोई मंदिर या कोई विग्रह मौजूद नहीं है।





आपको बता दें कि काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद मामले में नया मोड़ उस समय आया जब 18 अगस्त 2021 को एक पक्ष स्थानीय अदालत में गया और उसने गौरी गणेश सहित दूसरे देवी देवताओं की पूजा का अधिकार मांगा। अभी साल में एक बार ही गौरी गणेश की पूजा की इजाजत है।अदालत ने विवाद को सुलझाने के लिए पूरे परिसर की वीडियोग्राफी और सर्वे का आदेश दिया।माना जा रहा है कि इस वीडियोग्राफी और सर्वे के बाद अगर कोर्ट गौरी गणेश और दूसरे विग्रह सहित तहखाने पर कोई राय बनाता है तो फिर ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर का ऐतिहासिक विवाद किसी निर्णायक स्थिति पर पहुंच जाएगा।