डालसा के लोक अदालत में 56 मामले निष्पादित,10,42,500 रुपए का हुआ समायोजन





रेफरल जज और मध्यस्थों के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित





ब्यूरो प्रमुख,चाईबासा। जिला विधिक सेवा प्राधिकार पश्चिमी सिंहभूम के तत्वावधान में स्थानीय सिविल कोर्ट परिसर में मासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान गठित 10 बेंच ने मामलों की सुनवाई करते हुए कुल 56 मुद्दों का सफल निष्पादन किया तथा 10,42,500 रुपए की राशि का समायोजन भी हुआ।





प्राधिकार के सचिव राजीव कुमार सिंह ने बताया कि झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार रांची के निर्देशानुसार प्रत्येक माह लोक अदालत का आयोजन किया जाता है,जिसमें लोग अपने सुलहनीय मामलों के निष्पादन के लिए अपील कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में गठित बेंच में प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय योगेश्वर मणि, न्यायिक पदाधिकारियों ओम प्रकाश, जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम, सूर्य भूषण ओझा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय, कल्पना हजारिका जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ, शंकर महाराज मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी,विनोद कुमार अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, राजीव कुमार सिंह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार, मिलन कुमार, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी पोड़ाहाट, अमिकर परवार, रेलवे दंडाधिकारी, ऋषि कुमार न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी शामिल थे।





रेफरल जज और मध्यस्थों के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित





झारखंड राज्य सेवा प्राधिकार रांची के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार पश्चिमी सिंहभूम के तत्वधान में कोर्ट परिसर स्थित मीटिंग हॉल में न्यायिक पदाधिकारियों और मध्यस्थ अधिवक्ताओं के बीच आवश्यक बैठक का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य मध्यस्थता के माध्यम से मामलों के निष्पादन को सुलभ और सहज बनाना था।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विश्वनाथ शुक्ला ने न्यायिक प्रक्रिया में मध्यस्थता की भूमिका की विशेषताओं का वर्णन किया तथा इसके और प्रभावी बनाने पर चर्चा की।





कार्यक्रम का संचालन करते हुए सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार राजीव कुमार सिंह ने बताया कि यह विवाद सुलझाने की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा मध्यस्थ (मीडिएटर) निष्प्रभावी एवं निर्विकार व्यक्ति के रूप में, विवाद ग्रस्त पक्षकारों को एक ऐसे समझौते के लिये तैयार करता है जिस पर पक्षकारों की सहमति होती है।प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय योगेश्वर मणि ने न्यायिक प्रक्रिया में मध्यस्थता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए किसी भी मामले के सकारात्मक निष्पादन की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया।मौके पर उपस्थित अधिवक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।बैठक में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विश्वनाथ शुक्ला सहित सभी न्यायिक पदाधिकारीगण और अधिवक्तागण शामिल थे।उपरोक्त जानकारी प्राधिकार के सचिव राजीव कुमार सिंह ने दी।