पूसू प्रतिनिधि,गिरिडीह।राज्य के पूर्व ऊर्जा मंत्री लालचंद महतो ने स्वास्थ्य मंत्री,स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव,डीसी गिरिडीह एवं सिविल सर्जन गिरिडीह को पत्र प्रेषित कर अवगत कराया है कि जीटी रोड के किनारे स्थित डुमरी रेफरल अस्पताल में डॉक्टर के 11 पद स्वीकृत हैं,लेकिन वहां 3 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। वहीं अस्पताल प्रभारी सप्ताह में 6 दिन ही अस्पताल में रहते हैं,जिसके कारण 1 दिन रविवार को अस्पताल में डॉक्टर की मौजूदगी शून्य हो जाती है,जिससे समझा जा सकता है कि मरीजों की हालत क्या होती होगी।ठीक उसी प्रकार नर्स,कंपाउंडर एवं स्टाफ की कमी है।स्थाई सफाई कर्मी का अभाव है,जबकि अस्पताल में स्टाफ रहने के लिए जो क्वाटर बने हुए हैं। वह भी जर्जर हालत में है,जिससे कभी भी अप्रिय घटना घट सकती हैं।अस्पताल में दवा की कमी के कारण अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या में लगातार कमी हो रही है।वहीं सिजेरियन वाली प्रसूता का प्रसव नहीं किया जाता है और गरीब महिलाओं को प्राइवेट अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। जहां 30 हजार से 35 हजार रुपये तक का बिल प्रसव कराने में आता है।इस कारण गरीब लोगों को अपना जमीन आदि बिक्री कर प्राइवेट अस्पताल का बिल भरना पड़ता है।





लिखा कि डुमरी मोड़ स्थित अस्पताल डुमरी प्रखंड नावाडीह प्रखंड बगोदर प्रखंड के बीचो-बीच है। जहां चारों प्रखंडों के अस्पतालों से रेफर होकर मरीज एवं जीटी रोड में दुर्घटनाग्रस्त सीरियस मरीज रेफर होकर अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर जाते हैं,लेकिन रेफरल अस्पताल में दवा आदि एवं डॉक्टर नहीं रहने के कारण पुनः प्राइवेट अस्पताल या धनबाद एवं रिम्स रांची आदि अस्पतालों में रेफर कर दिया जाते हैं। इसी तरह अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं रहने से प्रत्येक महीने गर्भवती महिलाओं को निजी अल्ट्रासाउंड केन्द्र जांच हेतु भेजा जाता है।लिखा कि उपरोक्त समस्याओं को लेकर बहुजन सदान मोर्चा,पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा एवं अभिभावक एकता मंच द्वारा 19 जून को एक दिवसीय धरना अस्पताल के प्रांगण में देने का निर्णय लिया गया है।