आगरा।दुनियाभर में अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाने वाला ताजमहल के बंद 22 कमरों को खुलवाने के लिए दायर की गई याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच बीते दिनों खारिज कर चुकी है।इन दिनों मोहब्बत की निशानी ताजमहल और उससे जुड़े रहस्य इन दिनों सुर्खियों में हैं।इनमें से एक वाकया ताजमहल की नीलामी का है। शाहजहां द्वारा बनवाए गए ताजमहल की ब्रिटिश शासन में नीलामी हुई थी।नीलामी में ताजमहल को मथुरा के सेठ लक्ष्मीचंद्र ने सात लाख रुपए की बोली लगाकर खरीदा था।बाद में भारी विरोध के कारण नीलामी को रद्द कर दिया गया था,जिससे ताजमहल बच गया।





आगरा सन 1803 में ब्रिटिशर्स के नियंत्रण में आया था। भारतीय और अंग्रेजी लेखकों ने अपनी किताबों में ताजमहल की नीलामी का उल्लेख भी किया है। रामनाथ ने किताब द ताजमहल और ब्रिटिश लेखक एचजी केन्स ने आगरा एंड नेवरहुड्स में इसका जिक्र किया है।सन 1828 से 1835 तक लार्ड विलियम बैंटिक भारत में वायसराय रहे थे और वह चाहते थे ताजमहल की खूबसूरत पच्चीकारी के पत्थरों को तोड़कर उनकी बिक्री कर सरकारी खजाने को भरा जाए।





लार्ड विलियम बैंटिक के समय में भारत की राजधानी रहे काेलकाता से प्रकाशित होने वाले अंग्रेजी अखबार में 26 जुलाई 1831 को ताजमहल की नीलामी का विज्ञापन छपा था।इस नीलामी में राजस्थान और मथुरा के धन्नासेठों ने बोलियां लगाईं।मथुरा के धन्नासेठ लक्ष्मीचंद्र ने सात लाख रुपए की बोली लगाकर मोहब्बत की निशानी ताजमहल को खरीद लिया। ताजमहल को तोड़कर उसके कीमती पत्थरों को लंदन ले जाकर बेचने पर अधिक धन खर्च होने के कारण लार्ड विलियम बैंटिक ने ताजमहल की नीलामी को रद्द कर दिया।इसके बाद में लार्ड विलियम बैंटिक ने एक बार फिर ताजमहल की नीलामी की।इस नीलामी में धन्नासेठों के साथ ब्रिटिशर्स को भी बुलाया गया।इससे पहले ही भारत से लंदन गए किसी सैनिक ने लंदन असेंबली में इसकी शिकायत कर दी।भारी विरोध के कारण वायसराय को नीलामी रोकने लिए कहा गया।इससे ताजमहल बच गया।कुछ इतिहासकारों ने ताजमहल की नीलामी को अफवाह बताया है।इन इतिहासकारों ने अपनी किताबों में लिखा है कि ताजमहल के आसपास जीर्ण-शीर्ण भवनों और हवेलियों को तोड़कर खेती के लिए समतल किया गया था। इतिहासविद् राजकिशाेर राजे का कहना है कि बैंटिक ने ताजमहल के पत्थरों को बेचकर धन कमाने के लिए नीलामी कराई थी। ब्रिटिश काल में दाराशिकोह की हवेली को भी नीलाम किया गया था। ताजमहल की किस्मत अच्छी थी, जो वह बच गया।