नीति आयोग का सुझाव सराहनीय,बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा:आरके राजू
वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के प्रति भारत सरकार के नीति आयोग ने चिंता जताते हुए जो आवश्यक कदम उठाने पर बल दिया है इसकी सराहना की जानी चाहिए। बुजुर्गों की समस्याओं को रेखांकित करते हुए उसके समाधान की दिशा में केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों को भी सक्रिय होने की सलाह नीति आयोग द्वारा दी गई है। यह स्वागत योग्य है।
हमारे देश में बुजुर्गों की आबादी बढ़ रही है। हालिया सर्वेक्षण और नीति आयोग के आकलन के मुताबिक वर्ष 2050 तक देश में 60 वर्ष से अधिक आयु वाली आबादी वर्तमान समय की तुलना में 9 फीसदी बढ़कर करीब 19 फीसदी हो जाएगी। वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं में वृद्धि की मुख्य वजह हमारे देश में सामाजिक सुरक्षा की ठोस योजनाओं का अभाव है। नीति आयोग के मुताबिक देश में 19 प्रतिशत बुजुर्ग या तो तलाकशुदा हैं या उन्हें घर वालों ने उन्हें अलग कर दिया है।
ऐसे वरिष्ठ नागरिकों की संख्या काफी कम है,जिन्हें जीवन यापन लायक पेंशन मिलती है। वह पेंशन भी सिर्फ सरकारी सेवाएं देने वाले वरिष्ठ नागरिकों (सेवानिवृतकर्मियों) को मिलती है।निजी व असंगठित क्षेत्र के सेवानिवृत कर्मियों को पेंशन या तो मिलती ही नहीं और मिलती भी है तो ऊंट के मुंह में जीरा के समान भी नहीं होती।
कई राज्य सरकारें आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को प्रतिमाह बतौर पेंशन राशि उपलब्ध कराती है, लेकिन वह राशि भी इतनी पर्याप्त नहीं होती कि ठीक से बुजुर्ग अपना जीविकोपार्जन कर सकें।
हमारे देश में संयुक्त परिवार की परंपराएं विलुप्त होती जा रही हैं। एकल परिवारों की संख्या बढ़ रही है। नतीजतन बुजुर्गों की सही देखभाल नहीं हो पाती। वरिष्ठ नागरिक एकाकीपन का ही सामना नहीं करते, बल्कि उन्हें आर्थिक परेशानियों से भी रुबरु होना पड़ता है। विशेष तौर पर असंगठित क्षेत्र से सेवानिवृत हुए कर्मियों के पास बुढ़ापे में आमदनी का कोई सशक्त माध्यम नहीं होता, जिस कारण बुजुर्गों की समस्याएं दिन ब दिन बढ़ती ही जाती हैं।यही नहीं वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी जूझना पड़ता है।अधिकतर बुजुर्गों के पास स्वास्थ्य बीमा नहीं होता या फिर स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम जमा करने में भी सक्षम नहीं हो पाते हैं।
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के दायरे में सभी वरिष्ठ नागरिकों को शामिल किए जाने से काफी हद तक बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति में सुधार संभव है।गौरतलब है कि नीति आयोग ने वरिष्ठ नागरिकों की जमा रकम पर ब्याज दर की एक तर्कसंगत सीमा निर्धारित करने, वरिष्ठ नागरिक केयर होम्स की संख्या बढ़ाने सहित अन्य महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इन सुझावों को केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा प्राथमिकता पर लेते हुए यथोचित कदम उठाने की आवश्यकता है।
देश में जिस अनुपात में बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है।उस अनुपात में वृद्ध आश्रम और सीनियर सिटीजन केयर होम्स नहीं बन रहे हैं।इस दिशा में केंद्र व राज्य सरकारों के साथ-साथ गैर सरकारी सामाजिक संगठनों को भी आगे आने की जरूरत है।लेखक बिहार के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार हैं।





