वाराणसी।जीवन ज्योति अंध विद्यालय के नेत्रहीन बच्चों के हाथों से बने दीपक और मोमबत्ती से दीपावली रोशन होगी।यह सिलसिला पिछले दस वर्षों से चल रहा है।बच्चे दीपक, मोमबत्ती, क्रिसमस ट्री और क्राफ्ट बनाकर न सिर्फ अपनी प्रतिभा का परिचय दे रहे, बल्कि दूसरों के जीवन में भी प्रेरणा का प्रकाश भर रहे।





आपको बता दें कि इन बच्चों की आंखों में रोशनी नहीं है, लेकिन दीपावली के मौके पे ये दूसरों की जिन्दगी में रोशनी भरने के लिए दीपावली से एक-दो महीने पहले से ही जुट जाते हैं।इनमें कई बच्चे मेंटली रिटायर्ड, हियरिंग इम्पेयर्ड और फिजिकली हेंडीकैप्ड हैं।इसके बाद भी तमाम तरह की चीजें बनाकर समाज को प्रेरणा देने का काम कर रहे हैं।





अंध विद्यालय के शिक्षक मुकेश कुमार बताते हैं कि यह क्रम पिछले दस वर्षों से चल रहा है। बच्चों को दीपक, मोमबत्ती और अन्य सामग्री बनाने वाली वस्तुओं को स्पर्श कराकर ठीक ढंग से पहचान कराई जाती है। वहीं उन्हें सामग्री बनाने की प्रक्रिया समझाई जाती है। इसके बाद बच्चे खुद दीपक, मोमबत्ती आदि बनाना शुरू कर देते हैं। शुरूआत में थोड़ी मुश्किल होती है, लेकिन धीरे-धीरे बच्चे इसे बनाना सीख जाते हैं।





श्वेता कुमारी ने लोगों से नेत्रहीन बच्चों के बनाए दीप और मोमबत्ती खरीदने की अपील की। छात्रा खुशबू ने कहा कि हम दीपक इसलिए बनाते हैं ताकि हर घर में रोशनी मिले और इस दीपावली उनके घर में खुशियां आएं। खुशबू ने बताया कि शिक्षक दीप और मोमबत्ती बनाने में इस्तेमाल होने वाली एक-एक वस्तु का अनुभव कराते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे सीख जाते हैं।पहले क्राफ्ट, क्रिसमस ट्री बनाते हैं और दीपावली आती है तो मिट्टी के दीपक और कैंडल बनाते हैं।