चंडीगढ़ / नई दिल्ली

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, दो दशक पुराना और कृषि कानूनों के विरोध के चलते टूटा भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) का गठबंधन एक बार फिर बहाल होने की कगार पर है।

पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की मजबूत मौजूदगी के बीच, अपनी जमीन तलाश रहे दोनों ही दलों को अब एक-दूसरे के साथ की सख्त जरूरत महसूस हो रही है।

सीट शेयरिंग का नया फॉर्मूला: अब ‘छोटे भाई’ की भूमिका में नहीं रहेगी BJP

इस बार का गठबंधन पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि नए और बदले हुए शर्तों के आधार पर होगा। पर्दे के पीछे चल रही गहन बैठकों में सीटों के नए गणित पर तेजी से मंथन चल रहा है:

  • डबल सीटों का दावा: इससे पहले बीजेपी अकाली दल के साथ 117 में से केवल 23 सीटों पर ही चुनाव लड़ती आई है। लेकिन इस बार बीजेपी करीब 47 से 48 सीटों पर अपनी दावेदारी ठोक रही है।
  • लोकसभा प्रदर्शन बना आधार: जिन सीटों पर बीजेपी दावा कर रही है, उनमें से अधिकांश वे सीटें हैं जहाँ हालिया लोकसभा चुनावों के दौरान पार्टी को बढ़त मिली थी।
  • अकाली दल की हिस्सेदारी: शेष 69-70 सीटों पर अकाली दल अपने उम्मीदवार उतारेगा।

दिवाली के बाद और गुरु नानक जयंती के आसपास महा-घोषणा

सूत्रों का दावा है कि इस सियासी जुगलबंदी को धरातल पर उतारने के लिए एक बहुत बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया गया है।

  • तारीख और वक्त: इस ऐतिहासिक गठबंधन का आधिकारिक ऐलान दिवाली के ठीक बाद और गुरु नानक जयंती के पावन पर्व के आसपास किया जा सकता है।
  • बठिंडा रैली से शंखनाद: घोषणा को भव्य रूप देने के लिए बादल परिवार के सबसे मजबूत गढ़ बठिंडा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक विशाल रैली आयोजित करने की योजना है, जहाँ से इस नई साझेदारी का शंखनाद होगा।
  • NDA में वापसी और केंद्रीय मंत्रिमंडल: इस प्लान के तहत शिरोमणि अकाली दल की एनडीए में औपचारिक वापसी होगी और हरसिमरत कौर बादल को एक बार फिर से केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है: अकाली दल के किले बठिंडा से पीएम मोदी की रैली के जरिए न केवल रूठे हुए सिख मतदाताओं को बड़ा संदेश देने की कोशिश की जाएगी, बल्कि जमीनी स्तर पर दोनों पार्टियों के कैडर में नई ऊर्जा फूंकने का दांव भी खेला जाएगा।

नेताओं के सधे हुए बोल: 'आलाकमान के पास है मामला'

हालांकि रैली की सटीक तारीख और सीटों के अंतिम आंकड़े पर अभी आधिकारिक मुहर लगनी बाकी है। इसी वजह से दोनों दलों के शीर्ष नेता संभलकर बयान दे रहे हैं:

  • सुखबीर सिंह बादल (अकाली दल): गठबंधन के सवालों पर उनका कहना है कि "जो पार्टी पंजाब के हित और अकाली दल की विचारधारा से सहमति रखती है, उसके साथ गठबंधन के रास्ते खुले हैं।"
  • पंजाब BJP नेतृत्व: पार्टी नेताओं का कहना है कि "हम अभी राज्य की सभी 117 सीटों पर अपनी तैयारी कर रहे हैं। अंतिम फैसला केंद्रीय आलाकमान के हाथों में है।"

AAP का तंज: 'कितना भी जोर लगा लें, सरकार नहीं बना पाएंगे'

पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी ने इस नए सियासी समीकरण पर तंज कसने में देर नहीं लगाई। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा:

"अकाली दल और बीजेपी चाहे मिलकर चुनाव लड़ लें या जितना मर्जी जोर लगा लें, पंजाब विधानसभा में उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं होने वाला। वे कभी भी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं पहुँच पाएंगे।"

निष्कर्ष

भले ही आधिकारिक तौर पर अभी घोषणा का इंतजार है, लेकिन पर्दे के पीछे चल रही इस सरगर्मी ने पंजाब के पूरे चुनावी माहौल में गरमाहट ला दी है। अगर यह गठबंधन सिरे चढ़ता है, तो पंजाब का आगामी विधानसभा चुनाव बेहद रोचक और त्रिकोणीय मुकाबले में बदल जाएगा।

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