वाराणसी।देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं।बीते 20 दिनों में बीएचयू परिसर में चार छेड़छाड की घटनाएं हुईं। अचंभित करने वाली बात यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक हर महीने खर्च करता है।इसके बावजूद भी परिसर में हुईं इन घटनाओं से छात्राओं में रोष के साथ डर का माहौल भी है।





बताते चलें कि साल 2017 में छेड़छाड़ की एक घटना के बाद बड़ा बवाल हुआ था।बीएचयू की छात्राएं सड़़क पर उतरी थीं।परिसर में एक लड़की से छेड़छाड़ के बाद बीएचयू की छात्राएं सिंह द्वार पर धरने पर बैठी थीं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 23 सितंबर को वाराणसी दौरे पर आए और विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। छात्राओं के इसी विरोध की वजह से पीएम मोदी को बीएलडब्लू से दुर्गाकुंड जाते समय अपना रास्ता भी बदलना पड़ा था।उस दौरान सुरक्षा एजंसियों ने भी काफी नाराजगी जाहिर की थी और स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट तलब की थी। इसके बाद विवाद इतना बढ़ा की उस समय के तत्कालीन कुलपति गिरीश चन्द्र त्रिपाठी को लम्बी छुट्टी पर भेज दिया गया था।





अब एक बार फिर बीएचयू में छेड़छाड़़ की वैसी घटनाएं बढ़़ती जा रही हैं।बीएचयू में इस साल छेड़छाड़़ की पहली घटना 8 जनवरी को हुई थी।इसके बाद 13 जनवरी को आईआईटी बीएचयू की छात्रा से हैदराबाद गेट के पास शोहदों ने छेड़छाड़ की थी।इसकी रिपोर्ट चितईपुर थाने में लिखी गई थी।इन दोनों मामलों के बाद 21 जनवरी को लिमडी चौहारे पर भी छात्रा से छेड़छाड़ हुई।इस घटना के 4 दिन बाद लिफ्ट देने के नाम पर छात्रा से हुई छेड़छाड़ के बाद बीएचयू की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।





बीएचयू की छात्रा चंदा यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय में गर्ल्स स्टूडेंट की सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है।कई बार ऐसा भी होता है कि ऐसी छोटी वारदातों के बाद लड़कियां शिकायत भी नहीं करती हैं।छात्रा आकांक्षा आजाद ने बताया कि हर दिन लड़कियां कैम्पस में छेड़खानी की शिकार होती हैं, लेकिन वो घर के दबाव के कारण इसकी लिखित शिकायत नहीं करती हैं। आकांक्षा ने कहा कि प्रोक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मी भी ऐसी घटनाओं के बाद ही एक्टिव होते हैं।इससे इतर विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर का कहना है कि विश्वविद्यालय में 24 घंटे सुरक्षा गार्ड छात्राओं की सुरक्षा के लिए तैनात होते हैं।





चीफ प्रॉक्टर अभिमन्यु सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में कुल 780 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जो कि 24 घंटे विश्वविद्यालय में स्टूडेंट्स की सुरक्षा में लगे होते हैं।रोटेशन के हिसाब से इनकी ड्यूटी लगाई जाती है।इसके अलावा कुछ चौराहों पर सीसीटीवी भी लगे हैं।विश्वविद्यालय के सुरक्षा में लगभग हर साल 25 से 30 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।