रांची।झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन के सबसे बड़े विरोधी गोड्डा के भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दूबे का सोमवार को एक ट्वीट ने एक बार फिर खलबली मचा दी है।भाजपा सांसद ने इस बार बांग्‍लादेश कनेक्‍शन खोज निकाला है।इनके मुताबिक इस मामले में एनआईए को अहम सुराग मिले हैं। जिसकी जांच की जा रही है। देशद्रोही कृत्‍य करने वाले की अब खैर नहीं है।





भाजपा सांसद ने एक और ट्वीट में सीएम हेमंत सोरेन द्वारा प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) को दी गई चेतावनी पर लिखा- सर प्रवर्तन निदेशालय तो कोटरीवार तक पहुंचकर आपके पास पहुंच गई, गलती नहीं सही से ही पहुंची है। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में मौखिक और हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि भ्रष्टाचार के तार आपसे जुड़े हैं, यह भाषण किसके लिए।बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक दिन पहले दिल्‍ली में न्‍यूज चैनलों को दिए इंटरव्‍यू में ईडी को सख्‍त चेतावनी दी थी। सीएम सोरेन ने कहा था कि ईडी अगर गलती से भी उनके पास पहुंच गई तो बहुत मुसीबत झेलेगी।





भाजपा सांसद निशिकांत ने ट्विटर पर अपने संदेश में लिखा- पिछले तीन वर्षों में बांग्लादेश की लगातार यात्रा करने वाले झारखंड का पैसा बांग्लादेश के रास्ते भेजने वाले को एनआईए ने खोज लिया है।आदि‍वासि‍यों के नाम पर परिवारवादी व देशद्रोही व्यक्ति की अब खैर नहीं। इस ट्वीट में उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया है,लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि रोज-रोज के ट्वीट की तरह इस ट्वीट का भी झारखंड में चल रही ईडी की जांच-छापेमारी से गहरा जुड़ाव है। उन्‍होंने उदृत व्‍यक्ति के बारे में कहा है कि उन्‍होंने तीन साल में बांग्‍लादेश की लगातार यात्रा की है। इस दौरान पैसे का भी लेनदेन किया गया है।





निशिकांत दूबे ने एक और ट्वीट करते कहा कि छापेमारी में मिले दस्‍तावेजों की जांच के दौरान बांग्लादेश के साथ अवैध व्यापार व लेनदेन का हिसाब केंद्रीय जांच एजेंसियों को मिला है। झारखंड की इस दुर्गति के लिए कांग्रेस भी उतनी ही जिम्‍मेदार है। इस पार्टी ने इसके पहले मधु कोड़ा जी से राज्य लुटवाया अब बांग्लादेश के व्यापारियों से‌।





आपको बता दें कि बीते दिनों भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के एक टीवी इंटरव्‍यू को टैग करते हुए खास चौपाई लिखी थी। उन्होंने गोस्‍वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस की पंक्तियों को उदृत करते हुए लिखा था, बिनय ना मानत जलधि जड़, गए तीन दिन बीत। बोले राम सकोप तब, भय बिन होय न प्रीत। इस चौपाई के मायने ये हैं कि अनुनय-विनय नहीं मानने पर भय का सहारा लेना ही पड़ता है। जिस तरह प्रभु श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र से रास्‍ता मांगा था और वो नहीं माना। तब मर्यादा पुरुषोत्तम ने अपने शक्ति वाण से समुद्र की जड़ता को समूल नष्‍ट कर दिया।