लखनऊ।भारत का पाकिस्तान पर पिछले 73 सालो से 300 करोड़ रुपए का कर्ज है।भारत सरकार ने इस कर्ज को आज तक ना तो बट्टे खाते में डाला और ना ही इस पर कभी ब्याज जोड़ा है।हर साल के बजट में इसका जिक्र जरूर रहता है।





देश के बंटवारे से पहले भारत पर 2,965 करोड़ रुपए का कर्ज था। ये कर्ज विभिन्न देशों और एजेंसियों का था।भारत और पाकिस्तान के अलग होने पर इस कर्ज का लगभग 10 फीसदी पाकिस्तान के हिस्से में आया जो कि लगभग 300 करोड़ रुपए माना गया।





साल 1950-51 के आम बजट में भारत सरकार की देनदारियों में पाकिस्तान पर इस बकाया का उल्लेख किया गया था। तब से हर साल के बजट में इसका उल्लेख रहता है। जानकारों का कहना है कि सरकार किसी भी पार्टी की रही हो खास रणनीति के तहत भारत ने आज तक इस कर्ज को एनपीए या बट्टे खाते में नहीं डाला है।खास बात यह है कि भारत और पाकिस्तान के बीच इस मसले का आज तक हल नहीं हो पाया है।





प्रादेशिक वित्त सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी आलोक अग्रवाल बताते हैं कि यह कर्ज डॉलर में रहा होगा। अगर तब से इस पर ब्याज और डॉलर के मुकाबले रुपए के अवमूल्यन की गणना की जाए तो यह राशि कई लाख करोड़ रुप‌ए होगी।





वर्तमान में केंद्र सरकार पर 169.47 लाख करोड़ रुपए की देनदारियां हैं। ये सार्वजनिक ऋण, आंतरिक व बाह्य ऋण और अन्य देनदारियों के मद में हैं।