प्रयागराज।देश में अपने बयानों द्वारा सुर्खियों में छाए रहने वाले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।महंत का शव अल्लापुर में बाघम्बरी गद्दी मठ के कमरे में फंदे से झूलता हुआ पाया गया है।



महंत की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर मिलते ही संगम नगरी से लेकर राजधानी लखनऊ तक हड़कंप मचा गया।आईजी रेंज प्रयागराज केपी सिंह और पुलिस के आला अधिकारी आनन फानन में मठ पहुंचे।



आईजी जोन ने बताया कि फिलहाल ये मामला फांसी लगाकर आत्महत्या करने का लग रहा है।फोरेंसिक टीम को घटनास्थल पर बुलाया गया है।ये भी पता चला है कि शिष्यों ने दरवाजा तोड़कर शव को फंदे से उतारा। मौके पर सुसाइड नोट मिला है जिसमें शिष्य आनंद गिरि से प्रताड़ित होने की बातों का जिक्र किया गया है।पोस्टमार्टम के बाद ही महंत के मौत की वजह साफ होगी। सुसाइट नोट की हैंड राइटिंग की भी जांच होगी।



इस बीच हरिद्वार में महंत के विवादित शिष्य आनंद गिरि को पुलिस ने हिरासत में लिया है और इसके अलावा दो अन्य शिष्यों आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को प्रयागराज में पुलिस ने हिरासत में लिया है।तीनों का नाम सुसाइड नोट में है।पुलिस ने शिष्यों से बातचीत की तो पता चला कि पिछले पांच दिन से महंत नरेंद्र गिरि काफी तनाव और चिंतित थे और बात-बात पर झुंझलाने भी लगे थे। जांच में जुटी पुलिस ने मठ बाघम्बरी गद्दी के मुख्य गेट और अंदर लगे अलग अलग सीसीटीवी कैमरों को भी खंगालते हुए शिष्यों से गहन पूछताछ शुरू की।



आइजी जोन ने बताया कि सुसाइड नोट में महंत ने लिखा है कि वो सम्मान के साथ अभी तक जीवन जीते रहे मगर अब अपमानित होकर जीना पड़ रहा है। सुसाइड नोट में शिष्य से दुखी होने की बात है।



महंत से विवाद के बाद सुर्खियों में छाए शिष्य नरेंद्र गिरि ने इस घटना को हत्या करार देते हुए कहा है कि ये बड़ी साजिश है और उन्हें प्रताड़ित कर मरने के लिए मजबूर किया गया।उन्हें मेरा नाम सुसाइड नोट में लिखने के लिए मजबूर किया गया। नरेंद्र गिरि ने कहा कि मैंने तो माफी मांग ली थी और गुरू जी ने माफ भी कर दिया था।इस घटना की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।मैंने खुद और गुरू जी की हत्या की आशंका जाहिर की थी। आनंद गिरि ने पुलिस के एक बड़े अधिकारी और एक भू- माफिया को इस साजिश के पीछे बताते हुए जांच कराने की बात कही है।





महंत के मौत की खबर से शहर से उनके भक्त मठ पर जमा हो गए।पुलिस को महंत के भक्तों की भीड़ संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। बाघम्बरी मठ के भीतर केवल आला पुलिस अधिकारी और फोरेंसिक टीम ही मौजूद थी।



आपको बता दें कि संगम तट पर लेटे हुए हनुमान मंदिर के महंत नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य चर्चित योग गुरू आनंद गिरि के बीच पिछले दिनों विवाद काफी सुर्खियों में रहा था। आनंद गिरि को अखाड़ा परिषद और मठ बाघम्बरी गद्दी के पदाधिकारी के पद से हटा दिया गया था।उस दौरान दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप भी लगाए थे।कई साधु संतों ने महंत नरेंद्र गिरि का समर्थन भी किया था। महंत नरेंद्र गिरि ने कहा था कि आनंद गिरि हमसे माफी मांगे तब उनके बारे में कही कुछ सोचा जा सकता है और बाद में आनंद गिरि ने माफी भी मांग ली थी लेकिन उनका पद वापस नही मिला था।



रात करीब साढ़े सात बजे शव वाहन मठ के भीतर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों की बातों से अनुमान है कि रात में ही महंत के पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।इसकी तैयारी शुरू थी। सीएमओ को जिला प्रशासन से इस बारे में निर्देश भी दे दिया है।



महंत नरेंद्र गिरि पिछले करीब दो दशक से साधु संतों के बीच एक खास स्थान रखते थे।प्रयागराज आने पर चाहे बड़ा नेता हों या चाहे आला पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी हो वो महंत से आशीर्वाद लेने और लेटे हनुमान जी का दर्शन करने जरूर आता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद सहित अन्य मंत्री और सांसद तथा विधायक मंदिर और बाघम्बरी मठ आते रहे हैं। कल रविवार को भी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंदिर जाकर महंत से आशीर्वाद लिया था। पिछले दिनों डीजीपी मुकुल गोयल भी मंदिर में दर्शन पूजन करने पहुंचे थे।