प्रतिनिधि, हजारीबाग। मार्खम कॉलेज में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 126वीं जयंती पराक्रम दिवस के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर कॉलेज के एनएसएस के प्रोग्राम ऑफिसर सह डिस्ट्रिक्ट नोडल ऑफिसर भोला नाथ सिंह ने छात्र-छात्राओं एवं स्वयंसेवकों से अपने संबोधन में कहा कि नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ। उनकी 124वीं जयंती को देश में पहली बार पराक्रम दिवस के रूप में मनाई गई। कलकत्ता विश्वविद्यालय के स्कॉटिश चर्च कॉलेज से स्नातक दर्शनशास्त्र करने के पश्चात भारतीय सिविल सेवा को पूरा करने के लिए इंग्लैंड की यात्रा की। उन्हें ब्रिटिश सरकार पसंद नहीं थी, इसलिए 1921 में इस्तीफा दे दिया तथा भारत वापस आ गए। भारत लौटने पर उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल किया गया।
4 जुलाई 1943 को सिंगापुर के कैथे भवन के समारोह के दौरान आजाद हिंद फौज की कमान नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पास आई। उन्होंने भारतीय सिविल सेवा जैसी पद को त्याग कर देश के प्रति अपने को न्योछावर किया। उन्होंने अपने कर्तव्य बोध को समझा। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर नेताजी की मूर्ति स्थापित की गई है। आज पूरे देश में युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस की राष्ट्रीय युवा दिवस एवं पराक्रम दिवस को 12 जनवरी से 23 जनवरी तक कर्तव्य बोध के रूप में मनाया जाता है। पराक्रम दिवस की शुरुआत मार्खम कॉलेज स्थित विज्ञान भवन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर पर प्रोग्राम ऑफिसर एवं भूगोल के शिक्षक दशरथ यादव ने माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर किया।
इस अवसर पर सभी छात्र- छात्राओं ने नेताजी की तस्वीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। समारोह के पश्चात एक रैली निकाली गई, जिसमें नेताजी अमर रहे एवं तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा के नारे लगाए गए। इस अवसर पर स्वयंसेवकों में मुख्य रूप से प्रगति प्रेरणा,शिवा कुमार, कृष्णा कुमार साव, काजल कुमारी, प्रीति कुमारी समेत काफी संख्या में छात्र एवं में स्वयंसेवकगण उपस्थित थे।





