रांची।रूस और यूक्रेन में चल रही मैदाने जंग का प्रभाव झारखंड में खाद आपूर्ति पर पड़ सकता है।केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार को इससे अवगत कराते हुए राज्य सरकार से कहा है कि इस वर्ष खरीफ के मौसम में खाद की आपूर्ति पर विशेष नजर रखने की जरूरत है। किसानों को इसके विकल्प की जानकारी देने की आवश्यकता है।इसे लेकर सोमवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर फिर राज्यों के साथ समीक्षा करने वाले हैं।





भारत सरकार कुल जरूरत का 66 फीसदी खाद देश में तैयार करती है और बाकी खाद दूसरे देशों से आती है। इसमें सबसे अधिक खाद रूस और यूक्रेन से आती है और इसके अतिरिक्त चीन से भी खाद आती है।रूस और यूक्रेन में चल रही मैदाने जंग की वजह से वहां से आयात पूरी तरह ठप हो गया है।चीन ने दूसरे देशों को यूरिया भेजने से इनकार कर दिया है।इस कमी से कैसे निपटा जाए इसे लेकर राज्यों को निर्देश दिया गया है।





कृषि निदेशक निशा उरांव का कहना है कि यूरिया की कालाबाजारी रोकने के लिए विशेष जोर दिया जाएगा और कोशिश रहेगी कि सही किसानों को यूरिया मिल सके।इसके लिए विशेष मॉनटरिंग की जायेगी।किसानों से आग्रह है कि बिना पॉश मशीन के यूरिया की खरीद नहीं करें। उन्होंने कहा कि बीते साल यूरिया की कालाबाजारी रोकने के लिए विशेष अभियान चला था। 2020-21 में 1500 और 2021-22 में भी 1000 के लगभग दुकानों का निरीक्षण किया गया था।दोनों साल मिलाकर 200 से अधिक लाइसेंस निलंबित किए गये थे। 20 से अधिक एफआईआर भी दर्ज की गयी थी।





कृषि मंत्री बादल ने कहा कि भारत सरकार ने आगाह किया है कि इस वर्ष खरीफ के मौसम में खाद की कमी हो सकती है। इसके मद्देनजर तैयारी करने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया है।अधिकारियों को खाद की आपूर्ति और किसानों को मिलने वाली सुविधा पर विशेष ध्यान देने का निर्देश है।





खाद कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि दूसरे देशों से जो यूरिया आती है, उसकी कीमत 4000 से 4500 रुपए प्रति बैग होती है।इसके अतिरिक्त देश में जो यूरिया कंपनी बना रही है, उसकी लागत 2900 से 3200 रुपए प्रति बैग है।यह किसानों के बीच 300 रुपए प्रति बैग बिकती है।यूरिया का जिस रॉ मैटेरियल से बनती है उसकी कीमत बढ़ गयी है।





केंद्र सरकार ने झारखंड के लिए खाद का आवंटन तय कर दिया है।झारखंड सरकार ने 225000 एमटी यूरिया मांगा था।इसकी तुलना में 17000 एमटी यूरिया देने का वादा किया गया है।इसके अतिरिक्त 75000 एमटी डीएपी, 2000 एमटी एमओपी, 10000 एमटी एसएसपी, 30000 एमटी एनपीकेएस देने का वादा किया है।