वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला:
यूरोपीय देशों में इन दिनों व्यापक स्तर पर असंतोष और विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। फ्रांस, इटली, स्पेन से लेकर अल्बानिया और बेल्जियम (ब्रसेल्स) तक के कई प्रमुख शहरों में छात्रों, युवाओं, श्रमिकों और पेंशनभोगियों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। कई जगहों पर स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी भिड़ंत देखने को मिली, जिसके बाद सुरक्षा बलों को आंसू गैस, वॉटर कैनन और कड़े सुरक्षा इंतजामों का सहारा लेना पड़ा।
1. फ्रांस: 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, शाम ढलते ही भड़की हिंसा
फ्रांस की राजधानी पेरिस सहित देश के विभिन्न हिस्सों में शनिवार को श्रमिक संगठनों और युवाओं के आह्वान पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए।
- भीड़ के आंकड़े: गृह मंत्रालय के अनुसार देशभर में लगभग 4.1 लाख लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जबकि जनरल कन्फेडरेशन ऑफ लेबर (CGT) यूनियन का दावा है कि यह संख्या करीब 8 लाख थी।
- सुरक्षा और गिरफ्तारियां: कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 70,000 पुलिसकर्मियों के साथ हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद गाड़ियां और वॉटर कैनन तैनात किए गए थे। फ्रांसीसी गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि पुलिस ने अब तक 135 लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से हथियार जब्त किए गए हैं।
- राजनीतिक विरोध: ऑरलियंस शहर में मरीन ले पेन की दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी के सम्मेलन के खिलाफ हजारों लोगों ने मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और मरीन ले पेन दोनों के खिलाफ नारेबाजी करते दिखे।
- आगामी हड़ताल: फ्रांस की प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने आगामी 5 नवंबर को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया है।
2. इटली: रोम और मिलान में युवाओं का फूटा गुस्सा, पीएम मेलोनी के इस्तीफे की मांग
इटली में प्रधानमंत्री जियॉर्जिया मेलोनी के खिलाफ युवाओं और छात्रों का आक्रोश सड़कों पर साफ नजर आया।
- मिलान का मंजर: प्रदर्शनकारियों ने "सरकार के झूठ को ना" जैसे बैनर लेकर मार्च निकाला और ऊर्जा नियामक के बाहर विरोध स्वरूप खाद फेंककर एक प्रतीकात्मक बिजली बिल जलाया। सुरक्षा के मद्देनजर मिलान में ओमेगा, टिफ़नी और गुच्ची जैसे कई लक्जरी ब्रांड्स के आउटलेट्स को अपनी खिड़कियां बंद रखनी पड़ीं। शहर में सुरक्षा के लिए 500 अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया था।
- रोम में प्रदर्शन: राजधानी रोम में छात्रों और युवाओं ने पीएम जियॉर्जिया मेलोनी से पद छोड़ने की मांग की। हालांकि, छात्र संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण विरोध है और वे उपद्रव करने वाले अराजक तत्वों से अलग हैं।
3. अल्बानिया: उग्र प्रदर्शनकारियों ने कृषि मंत्रालय के गेट में लगाई आग
अल्बानिया की राजधानी तिराना में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और खराब शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ चल रहा प्रदर्शन अत्यंत हिंसक हो गया।
- हिंसा और तोड़फोड़: प्रदर्शनकारियों ने कृषि मंत्रालय के गेट में आग लगा दी, सरकारी इमारतों और बैंकों को निशाना बनाया तथा पुलिस पर पथराव किया।
- पुलिस की कार्रवाई: दंगा पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए वॉटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसू गैस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री एडी रामा ने हिंसक प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए छात्रों को संवाद के लिए आमंत्रित किया है।
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4. स्पेन, पुर्तगाल और ब्रसेल्स: महंगाई और आवास संकट पर उबाल
- स्पेन (मैड्रिड): हजारों सेवानिवृत्त लोगों और नागरिकों ने सार्वजनिक पेंशन में किसी भी तरह की कटौती न करने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण मार्च निकाला। इसके अलावा, लगातार बढ़ते मकानों के किराए और जीवन-यापन की लागत के खिलाफ 11 नवंबर को आम हड़ताल का ऐलान किया गया है।
- पुर्तगाल (लिस्बन): किफायती मकानों की मांग और सरकार की नई किराया नीतियों के विरोध में लोग सड़कों पर उतरे।
- ब्रसेल्स (बेल्जियम): शिक्षा प्रणाली में बेहतर सुधारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़पें हुईं। पुलिस ने नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया।
आगे और तेज हो सकता है आंदोलन
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय देशों में यह जनाक्रोश अभी थमने वाला नहीं है। जर्मनी में युवाओं के संगठन 'जेन जी रिगेल्ट' ने 31 अक्टूबर को देशभर में बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। वहीं, इटली की यूनियनों ने 20 नवंबर को 'डे ऑफ एक्शन' का ऐलान किया है, जिससे आने वाले दिनों में यूरोप का राजनीतिक और सामाजिक पारा और अधिक गर्म रहने की आशंका है।
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