रांची।सत्तासीन झारखंड मुक्ति मोर्चा की वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास पर तगड़ा पलटवार किया है।रघुवर दास ने सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर पत्नी के नाम जमीन लेने संबंधी आरोप के बाद सुप्रियो ने मीडिया को संबोधित करते हुए रघुवर पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अपने शासनकाल में अपने बेटे समेत 100 से अधिक करीबियों को टाटा समूह की विभिन्न कंपनियों में दबाव बनाकर नौकरी दिलाई।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता की और दावा किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद को तत्कालीन रघुवर दास की सरकार ने ही 2016 में स्टोन क्रशर का लाइसेंस दिया था और अब वो इसे गलत बता रहे हैं।
सुप्रियो ने सीएम हेमंत पर लगाए गए रघुवर के आरोपों को गलत और भ्रामक बताते हुए इसे सरकार को अस्थिर करने की साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि रघुवर दास और भाजपा को दलितों और आदिवासियों से चिढ़ है। इसी वजह से एक आदिवासी मुख्यमंत्री उनकी आंखों में चुभ रहे हैं।
सुप्रियो ने कहा कि रघुवर दास के कार्यकाल में निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए आयोजित मोमेंटम झारखंड में बड़ा घोटाला हुआ है।इस पूरी गड़बड़ी का खुलासा होगा। चाउमीन बेचने वालों से भी जमीन का एमओयू किया गया।ऐसी कई हैरान करने वाले तथ्यों से पर्दा उठेगा।उन्होंने कार्रवाई में हो रही देरी से जुड़े सवाल पर कहा कि कोरोना में दो साल गुजर गए।
सुप्रियो ने कहा कि हेमंत सरकार को अस्थिर करने की साजिश में भाजपा लगी हुई है, लेकिन मेरा दावा है कि 30 साल तक हेमंत सोरेन की सरकार को कोई हिला नहीं सकता।जब तक लोकतंत्र है, तब तक राज्य में हेमंत सोरेन की सरकार रहेगी।उन्होंने आशंका जताई कि महाराष्ट्र, बंगाल की तरह केंद्रीय एजेंसियों का खौंफ दिखा कर झारखंड में भी साजिश चल रही है। विधानसभा के तीन उपचुनाव में भाजपा के नेता कहते रहे कि परिणाम आने के बाद हेमंत सरकार गिर जाएगी।
सुप्रियो ने रघुवर पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रहते विधानासभा चुनाव हार गये। लिहाजा उन्हें बोलने का हक नहीं है। रघुवर अब मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं और हेमंत सोरेन से इस्तीफा मांग रहे हैं। उन्हें समझना चाहिए कि इस्तीफा कोई मिठाई नहीं है, जो बार-बार मांग रहे हैं। उन्हें मुख्यमंत्री बनने का सपना देखना अब बंद कर देना चाहिए। जिस पत्थर खदान का आरोप रघुवर ने लगाया है उसका चुनाव आयोग को सौंपे गए शपथपत्र में उल्लेख है। राज्यपाल ने ज्ञापन चुनाव आयोग को भेजा है। न्यायिक की प्रक्रिया में हमें भी शामिल किया जाना चाहिए। हमारा भी पक्ष शामिल किया जाना चाहिए।





