विशेष संवाददाता
रांची।स्विचऑन फाउंडेशन द्वारा रांची प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक स्वास्थ्य सलाह (हेल्थ एडवाइजरी) जारी की गई।प्रदूषित सर्दियों के दिनों के प्रभावों से बेहतर तैयारी के लिए नागरिकों द्वारा रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाए जाने वाले निवारक उपायों और प्रथाओं के अलावा स्वास्थ्य सलाह कई तरीके प्रदान करती है जिससे नागरिक वायु प्रदूषण के प्रभाव को रोक सकते हैं।प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लेने वाले चिकित्सकों ने इस समस्या की भयावहता को समझने का आह्वान किया। यह लाखों लोगों को मार रहा है, यह बीमारी, विकलांगता का कारण बन रहा है, और इससे देश को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
झारखंड में बाहरी वायु प्रदूषण के प्राथमिक कारण वाहन उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों, कारखानों, जलते हुए ठूंठ और जीवाश्म ईंधन और जंगल की आग से एरोसोल और गैस नामक ठोस, तरल कण हैं। वायु प्रदूषण के सभी चिंताजनक तथ्यों के बीच, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) पीएम2.5 और पीएम10 के स्तर को 20 से 30 प्रतिशत तक वर्ष 2024 तक कम करने के समयबद्ध लक्ष्य के साथ वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा बनाने का एक दुर्जेय प्रयास रहा है।
झारखंड भारत का 8वां सबसे प्रदूषित राज्य है,जहां पीएम2.5 की औसत सघनता 61.6 है।यदि झारखंड अपने औसत पीएम 2.5 प्रदूषण को एक्यूएलआई के अनुसार डब्ल्यूएचओ दिशानिर्देश द्वारा निर्धारित स्तर तक कम कर देता है, तो यह अपने औसत निवासी के जीवन में 5.6 वर्ष जोड़ देगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लेते हुए डॉ. निरुपम शरण, वरिष्ठ सलाहकार और हेड रेस्पिरेटरी मेडिसिन, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी एंड स्लीप मेडिसिन, पारस एचईसी अस्पताल रांची ने कहा,वायु प्रदूषण प्रत्येक व्यक्ति के लिए वैश्विक जीवन प्रत्याशा के 2.2 वर्ष कम कर देता है, इसलिए हम प्रत्येक की जिम्मेदारी है की हम प्रदूषण को कम करने का प्रयास करे।
सुप्रोवा चक्रवर्ती, कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट, राज अस्पताल, रांची ने कहा,भारत में लगभग 2 मिलियन मौतें सीधे वायु प्रदूषण के कारण होती हैं। सीओपीडी वर्तमान में हृदय की समस्याओं के बाद भारत में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है और छोटे बच्चों और महिलाओं में बीमारी के कारण अस्थमा के मामले भी काफी उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं।बायोमास ईंधन जोखिम और घरेलू प्रदूषण भारत में सीओपीडी के गैर-धूम्रपान मामलों के बड़े मामलों का प्रमुख कारण है।
आयोजित कार्यक्रम राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के साथ मेल खाता है, जो हर साल 2 दिसंबर को उन लोगों की याद में मनाया जाता है,जिन्होंने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी में अपनी जान गंवाई थी। इस साल भोपाल गैस त्रासदी की 38वीं बरसी है।यह मानव जीवन पर वायु प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय क्षरण की सभी हद तक क्षति के लिए एक अनुस्मारक के रूप में मनाया जाता है। 2 दिसंबर, 1984 की रात भोपाल में यूनियन कार्बाइड के रासायनिक संयंत्र से जहरीली रासायनिक गैस मिथाइल आइसोसाइनेट और अन्य जहरीली गैसों के आकस्मिक निर्वहन के कारण हुई घातक घटना के साथ वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में बड़ी समानता है।
डॉ स्वाति बेहरा शरण, निदेशक - द हैप्पी लंग्स, अजय बी शरण हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड की एक इकाई ने कहा, परिवेश के वायु प्रदूषण का मातृ श्वसन स्वास्थ्य और बचपन के अस्थमा पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
रांची पाल्स सेंटर के सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.ओ.पी महनसारिया ने कहा, वायु प्रदूषण मानव निर्मित सबसे बड़ी आपदा है। यह अब हम सभी जीवित प्राणियों के अस्तित्व को चुनौती दे रहा है। यह हमारे शरीर के लगभग सभी अंगों को व्यापक रूप से प्रभावित करता है। फेफड़े के रोग, हृदय की समस्याएं, उच्च रक्तचाप, कैंसर, अवसाद, और सीखने की अक्षमता जैसे कुछ नाम हैं। पर खतरनाक विचार यह है कि अब यह हमारे महत्वपूर्ण जीवनकाल के पहले 1000 दिनों (गर्भधारण से पहले 2 वर्षतक) पर इसके प्रभाव के माध्यम से एपिजेनेटिक्स को बदलने के लिए जाना जाता है।
रांची की हवा में पीएम2.5 की सांद्रता औसतन डब्ल्यूएचओ से अधिक है, जबकि एक्यूआई-यूएस का स्तर 114 रिकॉर्ड किया गया है। रांची में पीएम2.5 की मौजूदा मात्रा डब्ल्यूएचओ द्वारा तय सीमा से 2.5 गुना ज्यादा है। इससे लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले लोगों को सांस की बीमारी होने की आशंका हो सकती है साथ ही फेफड़े और हृदय रोग वाले लोगों पर अधिक प्रभाव पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों से पीएम2.5 सघनता के आधार पर, इस क्षेत्र में आने वाले महीनों में प्रदूषण का उच्च स्तर देखने की उम्मीद है।
स्विचऑन फाउंडेशन के संस्थापक विनय जाजू ने कहा, डॉक्टरों की ओर से आने वाली इन सलाहों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वाहन उत्सर्जन सबसे बड़ा उत्सर्जक है और शहर को तत्काल आधार पर साइकिल, पैदल और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।





