गाजियाबाद।बनारस सिलसिलेवार बम धमाके के मामले में सोमवार को गाजियाबाद की अदालत ने फैसला सुना दिया है।अदालत ने बमकांड के दोषी मुहम्मद वलीउल्लाह को फांसी की सजा सुनाई है। सात मार्च 2006 को बनारस में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। कोर्ट ने संकटमोचन मंदिर में विस्फोट और दशाश्वमेध मार्ग पर बम बरामद होने के मामले में वलीउल्लाह को दोषी माना।





बनारस बम कांड में दोषी वलीउल्लाह को न्यायाधीश जितेंद्र सिन्हा ने हत्या,आतंक फैलाना,विस्फोटक सामग्री का प्रयोग करना और हत्या के प्रयास के मामले में सजा-ए-मौत की सजा सुनाई है। इसके साथ ही संकट मोचन केस में दोषी पर 2.65 लाख और दशाश्वमेध घाट 1.40 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।वलीउल्लाह सजा के प्रश्न पर सुनवाई के दौरान अदालत से कहा कि घर मे 80 वर्ष की बूढ़ी मां, पत्नी, बेटा और बेटी की आर्थिक हालत खराब है। घर मे कोई कमाने वाला नहीं है। मदरसे में बच्चों को तालीम देकर गुजर-बसर करता था। जेल में उसका आचरण सही था, इसलिए उसे कम से कम सजा दी जाए। अदालत ने कैंट रेलवे स्टेशन पर हुए बम विस्फोट मामले में साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था।

वालीउल्लाह पिछले 16 साल से डासना जेल में बंद है।





वलीउल्लाह को सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला जज की अदालत में पेश किया गया। इससे पहले जिला जज के आदेश पर पूरे कोर्ट परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी और बम एवं डॉग स्क्वायड दस्ते द्वारा कोर्ट परिसर की गहन तलाशी ली गई। पुलिस चौकी के पास के मुख्य द्वार को भी बंद कर दिया गया। इस दौरान लोगों के आने-जाने के लिए मात्र एक गेट खुला रखा गया और उस पर भी सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। मीडियाकर्मियों को भी कोर्ट की ऊपरी मंजिल पर पूछताछ के बाद ही जाने दिया गया। वहीं जिला जज एवं सत्र न्यायालय के अंदर मीडिया को भी नहीं जाने की इजाजत नहीं दी गई।





जानें क्या है मामला





आपको बता दें कि सात मार्च 2006 की वह भयावह शाम में जगह-जगह पड़े मांस के लोथड़ों के बीच शुरू हुई पड़ताल में दहशतगर्दों तक पहुंचने के लिए पुलिस के पास कोई सुराग तक नहीं था, लेकिन पुलिस ने एसटीएफ और एटीएस के साथ मिलकर जांच शुरू की तो कॉल डिटेल खंगालने में ही बनारस ब्लास्ट को अंजाम देने वालों की शिनाख्त शुरू हो गई।तत्कालीन उपाधीक्षक भेलूपुर त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने विवेचना शुरू की तो कल डिटेल में बनारस ब्लास्ट का दोषी करार दिया जा चुका वलीउल्लाह सहित कई लोगों के मोबाइल नंबर पुलिस के हाथ के लगे। इसमें वलीउल्लाह की पड़ताल किए जाने पर पुलिस ने पाया कि यह इस हादसे से पहले कभी बनारस नहीं आया था।







वलीउल्लाह की अचानक शहर में आमद को लेकर पुलिस ने कड़ी मिलानी शुरू की तो सारे तार जुड़ते चले गए। लंबी जांच और पड़ताल के बाद पुलिस ने पांच अप्रैल 2006 को प्रयागराज जिले के फूलपुर गांव का रहने वाला वलीउल्लाह को राजधानी लखनऊ के पास से गिरफ्तार किया था।पुलिस गिरफ्त में आने के बाद जब वलीउल्लाह से पूछताछ शुरू हुई तो उसने अपने जेहादी इरादे भी जाहिर किए थे। बनारस धमाके में आईएसआई के पुराने मॉड्यूल से जुड़े आतंकियों के तार जुड़े होने की पुष्टि हुई थी।इस पूरी मशक्कत के बाद वारदात में शामिल हूजी कमांडर शमीम सहित तीन आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।





कैंट रेलवे स्टेशन और संकट मोचन मंदिर पर हुए ब्लास्ट में दर्ज मुकदमे के विवेचक त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने बताया कि पहले हुई आतंकी घटनाओं में शामिल दशगतगर्दों के बारे में जांच शुरू की और काल डिटेल खंगालनी शुरू की। इसमें वलीउल्लाह का नंबर ऐसा था जो बनारस में पहली बार एक्टिव था। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ाई तो उसका कनेक्शन सामने आया। उन्होंने बताया कि उसकी गिरफ्तारी के बाद उसके पास से विस्फोटक, डेटोनेटर और हथियार बरामद किया गया था।