श्रीप्रसाद सोनी





हज़ारीबाग़। स्वर्णकार सहित विश्वकर्मा समाज ने आम बजट का स्वागत किया है।कहा कि सदियों से हासिल हुनर को नई पहचान देने की पहल करने के लिए संसद में पेश की गई।आम बजट 2023 के जरिए केंद्र सरकार ने यह बड़ी पहल की है। स्वर्णकार समाज और विश्वकर्मा कुल के सदस्यों ने बजट का जोरदार स्वागत किया। कहा कि योजना को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए सरकार व प्रशासन के स्तर से कंधा से कंधा मिलाकर चलने के लिए तैयार हो जाना चाहिए।





पूरे विश्वकर्मा कुल समेत स्वर्णकार समाज खासकर आभूषण कारीगर, उदारीकरण के इस दौर में सरकार से जिस सहयोग और समर्थन की आस कर रहे थे,लगातार मांग कर रहे थे।उसे मोदी सरकार ने इस बजट के जरिए पूरा करने का प्रयास किया है। इस योजना का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों व मजबूत इच्छाशक्ति को जाता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जैसे ही अपने बजट भाषण में पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना की घोषणा की तो यह योजना काफी चर्चा में आ गई है। देश के तमाम कारीगरों खासकर विश्वकर्मा कुल से सदस्य नए सिरे से अपने विकास का मंच मिलने को लेकर उत्साहित हैं,जो स्वाभाविक भी है।





इस स्कीम के तहत आभूषण कारीगरों समेत तमाम शिल्पकारों एवं अलग-अलग तरह की चीजें तैयार करने वाले लोगों को सरकार की ओर से मदद की जाएगी। इसके स्कीम के तहत उन्हें ट्रेनिंग,फंडिंग दी जाएगी। तकनीकी सुविधाओं से भी लैस किया जाएगा। मोदी सरकार का मानना है कि इस योजना के तहत इन लोगों (आभूषण कारीगरों समेत तमाम शिल्पकारों ) को एमएसएमई सेक्टर का हिस्सा बनाया जाएगा।





दरअसल हिंदुओं और मुस्लिमों दोनों में ही कई कामकाजी बिरादरियां हैं, जिन्हें इसके दायरे में आने का लाभ मिलेगा। लोहार, बढ़ई, कुम्हार, दर्जी जैसी कई ऐसी बिरादरियां हैं, जिन्हें विश्वकर्मा जातियों में गिना जाता है। सरकार को लगता है कि इस स्कीम से इन वर्गों को साधा जा सकेगा।





सरकारी डेटा के मुताबिक विश्वकर्मा समाज के तहत देश की कुल 140 जातियां आती हैं। इनमें विश्वकर्मा, स्वर्णकार (सोनार), साहू, सोनी आदि जातियां शामिल हैं। इसके अलावा अलग-अलग उपनामों की कई अन्य बिरादरियां भी इसका हिस्सा है।